शोषितों की आवाज थे बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा : रामस्वरूप यादव

सामाजिक न्याय की लड़ाई में समाज के लिए दी शहादत

ऊँचाहार, रायबरेली। सामाजिक न्याय, समानता और शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज को बुलंद करने वाले बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा का नाम आज भी सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्हें लोकप्रिय रूप से ‘बिहार का लेनिन’ कहा जाता है। 2 फरवरी 1922 को बिहार के कुरहारी गांव में जन्मे जगदेव प्रसाद ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा हासिल कर पत्रकारिता और राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।

उक्त बातें तहसील क्षेत्र के पूरे कुशल पानी टंकी इस्थित आश्रम पर सेवानिवृत्ति राजस्व निरीक्षक रामस्वरूप यादव ने कही हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जगदेव बाबू समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे और उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन शोषित, पिछड़े, गरीब और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित किया। वे बिहार विधानसभा के सदस्य रहे और वर्ष 1968 में कुछ समय के लिए बिहार के उपमुख्यमंत्री भी बने। बाद में उन्होंने शोषित दल की स्थापना की, जो आगे चलकर शोषित समाज दल के रूप में जाना गया।

जगदेव प्रसाद केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली पत्रकार और विचारक भी थे। उन्होंने सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ लगातार आवाज उठाई। उनके भाषणों और आंदोलनों ने बिहार की राजनीति में शोषित वर्गों के सवालों को मजबूती से सामने रखा।

5 सितंबर 1974 को सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान कुर्था में पुलिस की गोली लगने से उनकी मृत्यु हुई। उनकी शहादत ने उन्हें बिहार के सामाजिक न्याय आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना दिया।

आज भी बाबू जगदेव प्रसाद के विचार सामाजिक बराबरी, लोकतांत्रिक अधिकार और वंचित समाज की भागीदारी की बहस में प्रासंगिक माने जाते हैं। उनका जीवन संघर्ष और साहस की ऐसी मिसाल है, जिसे आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी। कार्यक्रम का संचालन प्रेमचंद्र फौजी जी ने किया वहीं कार्यक्रम को ऊंचाहार प्रमुख प्रतिनिधि बीएन मौर्य, अमर बहादुर यादव, राम सुमेर मौर्य, सहदेव पासी, संजय मौर्य, चमन लाल गौतम, शिवकुमार कुशवाहा, प्रधान राजेंद्र गौतम सहित कई लोगों ने संबोधित किया, इस अवसर पर सैकड़ो की संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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