राम-भरत से अटूट प्रेम, त्याग, समर्पण देख दर्शक भाव विभोर
167वीं ऐतिहासिक विश्वविख्यात मैदानी रामलीला में धार्मिक क्रम जारी

जसवंतनगर,इटावा। नगर में आयोजित 167वीं ऐतिहासिक एवं विश्वविख्यात मैदानी रामलीला में श्री रामलीला समिति की ओर से भरत मनौआ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रामलीला के अंतर्गत आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के प्रति भरत के अटूट प्रेम, त्याग, समर्पण और भ्रातृभाव की परंपरा का भावपूर्ण चित्रण किया गया। कार्यक्रम नरसिंह जी मंदिर से शुरू होकर रामलीला मैदान तक पहुंचा। इस दौरान रामभक्तों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल रहा।
प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू व व्यवस्थापक अजेन्द्र सिंह गौर एवं समिति पदाधिकारियों की देखरेख में चल रही जसवंतनगर की ऐतिहासिक मैदानी रामलीला अपनी विशिष्ट परंपराओं, भव्य आयोजनों और धार्मिक आस्था के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष यहां रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाता है। इसी क्रम में श्री रामलीला समिति द्वारा भरत मनौआ कार्यक्रम आयोजित किया गया। नरसिंह जी मंदिर से रामलीला मैदान तक आयोजित इस कार्यक्रम ने रामकथा के महत्वपूर्ण प्रसंग को जीवंत किया।
भरत मनौआ प्रसंग भगवान श्रीराम और उनके छोटे भाई भरत के बीच अटूट प्रेम तथा त्याग की भावना का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास जाने के बाद भरत ने राजसुख का त्याग करते हुए उन्हें अयोध्या वापस लाने का प्रयास किया था। भरत का यह चरित्र भारतीय संस्कृति में भाई के प्रति प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग की मिसाल के रूप में स्थापित है। रामलीला में इस प्रसंग का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
नगर में लगातार चल रही रामलीला के चलते वातावरण राममय बना हुआ है। विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यपालन की प्रेरणा मिल रही है। 167वीं ऐतिहासिक मैदानी रामलीला के आयोजन को लेकर नगरवासियों में उत्साह बना हुआ है। श्री रामलीला समिति की ओर से परंपरागत ढंग से रामलीला के विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।



