हाउस टैक्स के बाद अब यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर का मुद्दा, व्यापारी बोले- बढ़ रहा आर्थिक बोझ

गाजियाबाद। नगर निगम के बढ़े हुए हाउस टैक्स को लेकर व्यापारी वर्ग की चिंता के बीच अब यूपीआई के निर्धारित व्यापारी लेनदेन पर एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) का मुद्दा भी सामने आया है। युवा महानगर उद्योग व्यापार मंडल गाजियाबाद के महानगर अध्यक्ष विपिन गोयल ने कहा कि व्यापारियों ने देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपनाने और बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू करते समय व्यापारियों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

विपिन गोयल ने कहा कि व्यापारी वर्ग हमेशा सरकार और देश के विकास में सहयोग करता रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर गाजियाबाद के व्यापारी बढ़े हुए हाउस टैक्स को लेकर अपनी समस्याएं उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यूपीआई से जुड़े एमडीआर का विषय सामने आया है। व्यापारियों पर पहले से ही किराया, बिजली, कर्मचारियों का वेतन, विभिन्न कर और अन्य कारोबारी खर्चों का बोझ है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च व्यापार की लागत को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि व्यापारी अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। व्यापार सुचारू रहने से बाजार, रोजगार और राजस्व व्यवस्था मजबूत होती है। इसलिए व्यापार से जुड़े किसी भी आर्थिक निर्णय में छोटे और मध्यम व्यापारियों की स्थिति, उनके लाभ मार्जिन और संचालन लागत को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सरकार की 15 सितंबर को जारी जानकारी के अनुसार, सभी व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई लेनदेन निशुल्क रहेंगे। दो हजार रुपये तक के व्यापारी भुगतान एमडीआर से मुक्त रहेंगे, जबकि निर्धारित नियमों के तहत दो हजार रुपये से अधिक के व्यापारी-से-व्यापारी भुगतान पर एमडीआर लागू होगा। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई लेनदेन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

विपिन गोयल ने सरकार से व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का कारण नहीं बननी चाहिए। छोटे और मध्यम व्यापारियों को अधिक से अधिक राहत देने के लिए उनकी समस्याओं पर विचार किया जाना जरूरी है।

उन्होंने कहा, “हम सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि व्यापारी हित में अपनी बात रख रहे हैं। व्यापारी सरकार का सहयोगी है और आगे भी सहयोग करता रहेगा। हमारी मांग है कि व्यापार से जुड़े आर्थिक निर्णय लेते समय व्यापारी वर्ग की राय और हितों को भी प्राथमिकता दी जाए।”

 

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