मां अंजना के संस्कार ही हनुमानजी के जीवन में दिखते हैं : अरविंद भाई ओझा

मोदीनगर में श्री हनुमत कथा में हुआ बाल लीलाओं का वर्णन, कथा व्यास ने सेवा, भक्ति और संस्कारों का बताया महत्व

मोदीनगर। सुचेतपुरी स्थित अजमीढ़जी भवन में चल रही श्री हनुमत कथा में कथा व्यास अरविंद भाई ओझा ने भगवान श्री हनुमानजी की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मां ही बच्चे के जीवन को गढ़ती है। बचपन में मिलने वाले संस्कारों का प्रभाव व्यक्ति के पूरे जीवन पर पड़ता है। माता अंजना द्वारा दिए गए संस्कार ही हनुमानजी के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।

कथा व्यास ने कहा कि माताएं जितनी विद्वान और संस्कारित होंगी, समाज भी उतना ही संस्कारित बनेगा। माता बच्चों को आदर्श, नैतिक मूल्य और अच्छे संस्कार प्रदान करती है। उन्होंने संयुक्त परिवारों के विघटन पर चिंता जताते हुए कहा कि इसके कारण समाज में अनेक समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इन समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

ज्ञान की भूख ने हनुमानजी को बनाया विशिष्ट

अरविंद भाई ओझा ने हनुमानजी, गरुड़ और संपाति के सूर्य तक पहुंचने के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि तीनों ने सूर्य को पाने के लिए उछाल लगाई, लेकिन हनुमानजी ही सफल हुए। उन्होंने बताया कि सूर्य ज्ञान के देवता हैं, जो जीवन से अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करते हैं। हनुमानजी में बचपन से ही ज्ञान प्राप्त करने की प्रबल इच्छा थी और उनके ज्ञान में अभिमान का कोई स्थान नहीं था।

सेवा ही भक्ति का मूल मंत्र

कथा व्यास ने कहा कि हनुमान चालीसा भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताने वाला पवित्र ग्रंथ है। हनुमानजी के जीवन का मूल मंत्र सेवा है। उन्होंने विभीषण को भी सेवा की महिमा का संदेश दिया था। अरविंद भाई ओझा ने कहा कि समस्त प्राणियों, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों में परमात्मा का वास मानकर उनकी सेवा करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले व्यक्ति पर भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है।

भक्त की वाणी में होने चाहिए सद्गुण

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि संसार भगवान के अधीन है, जबकि भगवान अपने सच्चे भक्त के प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होकर उसके वश में हो जाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने उडुपी के भक्त कनकदास का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भक्त की पुकार पर भगवान की मूर्ति घूम गई थी। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि उनकी वाणी ऐसी होनी चाहिए, जिससे समाज में धर्म, सद्बुद्धि, सद्भाव और सद्गुणों का प्रसार हो।

कथा के दौरान भक्तों ने श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। इस अवसर पर यजमान वासु एवं राशिका, ललित मित्तल, सभासद ललित त्यागी, विक्की विश्नोई, अंकित गोयल, विपुल शर्मा तथा रवि गोयल सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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