smart meter bill: बत्ती गुल, टेंशन फुल; कहीं आप भी तो नहीं फंसे स्मार्ट मीटर के फेर में

smart meter bill: स्मार्ट प्रीपेड मीटरों ने आजकल विद्युत उपभोक्ताओं की टेंशन ‘हाई’ कर रखी है। किसी मकान, दुकान या दफ्तर की बत्ती कब गुल हो जाए, कुछ पता नहीं चलता। परेशान उपभोक्ताओं को सभी जरूरी कार्य छोड़कर विद्युत कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहां पहले से फरियादियों की भीड़ मिलती है। पावर कारपोरेशन द्वारा पिछले काफी समय से पुराने मीटरों की जगह स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं।

नए मीटरों ने बढ़ाई ग्राहकों की मुश्किलें

इन मीटरों ने उन उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं, जिन्हें नई व्यवस्था की जानकारी नहीं है। दरअसल बैलेंस शून्य होने पर बगैर किसी पूर्व सूचना या चेतावनी के प्रीपेड मीटर से विद्युत आपूर्ति बंद हो जाती है। इसके बाद घर, दुकान व कार्यालय में अंधकार छा जाता है। नए सिस्टम से अंजान उपभोक्ता बिजली के इंतजार में कई घंटे गुजार देता है। वह तनाव में तब आता है, जब मालूम पड़ता है कि अड़ोस-पड़ोस में बिजली आ रही है। तदुपरांत वह इलेक्ट्रीशियन की खोज में निकल पड़ता है।

अंत में असल वजह पता चलने पर विद्युत कार्यालय में जाकर गुहार लगानी पड़ती है। इस दौरान घर में घरेलू कामकाज और दुकान में कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में यह गंभीर समस्या देखने को मिल रही है। राजधानी लखनऊ भी इसमें शामिल है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को एक तरह से पावर कारपोरेशन के निजीकरण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

हालांकि निजीकरण के विरोध में विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी लंबे समय से लामबंद होकर आवाज उठा रहे हैं। एक तरह से प्रीपेड मीटर उन उपभोक्ताओं की खराब आदत को सुधारने में भी काम आ रहा है, जो समय पर बकाया बिल का भुगतान नहीं करते।

बकाएदारों की फेहरिस्त है लंबी

बकाएदारों की फेहरिस्त लंबी होने पर विभाग को विशेष अभियान चलाना पड़ता है। इसके अलावा एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) भी हर साल आरंभ करनी पड़ती है। खैर विद्युत विभाग को उपभोक्ताओं की समस्या को देखकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। प्रीपेड मीटर के सभी उपभोक्ताओं को नई व्यवस्था के बारे में अवगत कराना चाहिए ताकि वह अनावश्यक परेशानी से बच सकें।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के मध्य छिड़ी जंग की वजह से भारत में इन दिनों ऊर्जा संकट निरंतर गहरा रहा है। रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से नागरिकों की टेंशन बढ़ी हुई है। इसके अतिरिक्त पेट्रोल एवं डीजल न मिलने की अफवाह जोर पकड़ने से माहौल खराब हो रहा है। ऐसे में बिजली संकट ने नई समस्या पैदा कर दी है। प्रीपेड मीटर के उपभोक्ता का बैलेंस शून्य होने से पहले इस संबंध में पूर्व सूचना के अलावा आपूर्ति बंद होने की सूचना भी दी जानी चाहिए। अन्यथा पावर सब स्टेशनों पर जगह-जगह बवाल होता रहेगा।

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इसका खामियाजा विभागीय कर्मचारियों को भुगतना पड़ेगा। प्रीपेड मीटर बिजली का एक ऐसा स्मार्ट मीटर है जो ‘पे-एज-यू-गो’ यानी पहले भुगतान करो, फिर बिजली उपयोग करो के सिद्धांत पर काम करता है। यह बिल्कुल मोबाइल फोन की भांति रिचार्ज होता है। बैलेंस खत्म होने पर विद्युत आपूर्ति स्वतः रुक जाती है, जिससे बिजली की खपत पर बेहतर नियंत्रण और सटीक बिलिंग मिलती है। इसमें मीटर रिचार्ज कराकर ही बिजली का उपयोग किया जा सकता है। इसमें माह के अंत में भारी-भरकम बिल आने की समस्या नहीं होती है।

यह डिजिटल तकनीक का उपयोग करता है, जो बिजली उपयोग को वास्तविक समय में मापता है। पुराने पोस्टपेड मीटरों की तरह इसमें मैन्युअल रीडिंग की जरूरत नहीं होती है।

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