ईरान से भिड़कर क्या ‘बर्बादी’ के जाल में फंस गए ट्रंप, खत्म होती दिख रही चौधराहट

News trump iran war: ईरान से उलझ कर अमेरिका और इजरायल ने क्या बड़ी गलती कर दी है? आवेश में आकर युद्ध की शुरुआत कर क्या अमेरिका बुरी तरह फंस गया है? डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिष्ठा क्या दांव पर लग गई है? क्या उन्हें आगे का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है? ईरान को तहस-नहस करने के लिए क्या अमेरिका-इजरायल कोई भयावह कदम उठाने की तैयारी में हैं? क्या ईरान के साथ-साथ यूएस की अर्थव्यवस्था भी बर्बाद हो जाएगी?
ट्रंप की अपील बेअसर
देश-दुनिया में यह ज्वलंत सवाल खूब उठ रहे हैं। दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ की सुरक्षा की खातिर कुछ देशों से सहयोग करने की डोनाल्ड ट्रंप की अपील बेअसर होने से जरूरी सवाल खड़े हो गए हैं। चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन आदि देशों ने ट्रंप को मानो ठेंगा दिखा दिया है। चीन और अमेरिका का छत्तीस का आंकड़ा है।
ऐसे में चीन द्वारा ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकरा देना कोई आश्चर्य की बात नहीं है, मगर बाकी देशों की अमेरिका के साथ खूब छनती रही है। हालांकि इन देशों ने इस महाजंग से खुद को दूर रखना बेहतर समझा है। ऑस्ट्रेलिया को प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का सबसे वफादार सहयोगी माना जाता है, मगर वहां की सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में अपना युद्धपोत भेजने से साफ मना कर दिया है।
दरअसल ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से समुद्री जहाजों के आवागमन को लेकर कुछ कड़ी शर्तें लागू कर रखी हैं। इन शर्तों का पालन किए बगैर किसी भी देश का जहाज इस मार्ग का उपयोग नहीं कर सकता है। ईरान ने खासकर अमेरिका और इजरायल के जहाजों की एंट्री बिल्कुल बंद कर रखी है। जानकारों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के घटते प्रभाव का संकेत है। जिस ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से दुनिया का बीस प्रतिशत तेल गुजरता है, वहां सुरक्षा के नाम पर ट्रंप का साथ देने को कोई भी अपना युद्धपोत जोखिम में डालने को तैयार नहीं है।
दांव पर अमेरिका की ‘चौधराहट’
वैसे अमेरिका की चौधराहट को पिछले कुछ समय में इस प्रकार की चुनौतियां मिली हैं, जिनकी उम्मीद ट्रंप प्रशासन ने नहीं की थी। डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने रवैये के कारण सहयोगी देश भी खासे परेशान चल रहे हैं। ऐसे में सहयोगी देशों ने अमेरिका से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इससे यूएस की साख को नुकसान पहुंच रहा है।
सुप्रीम लीडर खामेनेई के अलावा बड़ी संख्या में उच्चाधिकारियों और आम नागरिकों की जान जाने के बावजूद ईरान ने युद्ध से पीछे हटने का मन नहीं बनाया है। वह निरंतर पलटवार कर विरोधियों को परेशान कर रहा है। इस युद्ध में भारत का रुख सबसे बेहतर है। वह किसी पक्ष के समर्थन में खुलकर बात नहीं कर रहा। भारत ने बार-बार युद्ध रोकने व शांति की वकालत की है। फिलहाल दुनिया के दो ताकतवर राजनीतिज्ञ डोनाल्ड ट्रंप व नेतन्याहू की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
ये है वो वजह जिसके चलते दुबई को लगातार निशाना बना रहा है ईरान
ईरान यदि सरेंडर नहीं करता तो ट्रंप और नेतन्याहू की न सिर्फ मुश्किलें बढ़ेंगी बल्कि उन्हें घरेलू मोर्चे पर भी जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ सकता है। चिंता इस बात की भी नजर आती है कि ट्रंप अपनी हार को बरदाश्त नहीं कर पाएं और गुस्से में आकर कोई ऐसा कदम उठा दें, जो मानवता के लिए बेहद विनाशकारी साबित हो। चूंकि ट्रंप को अब तक यह समझ में आ गया है कि इस लड़ाई वह अकेला पड़ चुका है।



