हार्ट अटैक से लेकर बाईपास सर्जरी तक: इलाज में कितना खर्च आता है, आंकड़े आपको कर देंगे हैरान

World Heart Day के मौके पर एंजियोप्लास्टी और बाईपास सर्जरी के असली खर्च, आयुष्मान भारत योजना के फ़ायदे और दिल की सेहत बनाए रखने के ज़रूरी टिप्स के बारे में जानें।
आज वर्ल्ड हार्ट डे है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी, बढ़ता तनाव और unhealthy खान-पान की वजह से दिल की बीमारियों के मामले दिन-ब-दिन बढ़ रहे हैं। दिल की बीमारी न सिर्फ़ शरीर पर बुरा असर डालती है, बल्कि परिवार की जीवन भर की बचत पर भी भारी चोट करती है। अचानक हार्ट अटैक—और उसके बाद एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी—परिवार की आर्थिक स्थिति को तुरंत बिगाड़ सकती है। हार्ट अटैक के बाद इलाज का खर्च अस्पताल, बीमारी की गंभीरता और शहर पर निर्भर करता है।
शुरुआती खर्च जिसमें ICU में भर्ती होना, ECG, ट्रोपोनिन या दूसरे ब्लड टेस्ट और एंजियोग्राफी शामिल हैं—₹30,000 से ₹60,000 के बीच हो सकता है। एंजियोप्लास्टी में आर्टरी (धमनी) में रुकावट को दूर करने के लिए स्टेंट डाला जाता है। इस्तेमाल किए गए स्टेंट की संख्या और प्रकार के आधार पर, इसका खर्च ₹1 लाख से ₹3.5 लाख या उससे भी ज़्यादा हो सकता है।
बाईपास सर्जरी
जब कई ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) में गंभीर रुकावट होती है, तो बाईपास सर्जरी की सलाह दी जाती है। नामी प्राइवेट अस्पतालों में इस प्रक्रिया का खर्च ₹2.5 लाख से ₹6 लाख के बीच होता है। हालाँकि, अस्पताल से छुट्टी मिलने का मतलब यह नहीं है कि खर्च वहीं खत्म हो जाते हैं। लगातार होने वाले मासिक खर्च—जैसे खून पतला करने वाली दवाएँ, कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाएँ, समय-समय पर होने वाले टेस्ट और डॉक्टर की फ़ीस—कम से कम ₹3,000 से ₹8,000 तक हो सकते हैं।
अस्पताल के बिलों के अलावा छिपा हुआ आर्थिक संकट
यह सिर्फ़ ऑपरेशन का खर्च नहीं है; कई अप्रत्यक्ष कारण परिवारों को और ज़्यादा मुश्किल में डाल देते हैं। सर्जरी के बाद मरीज़ को आराम की ज़रूरत होती है। अगर परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य—चाहे पुरुष हो या महिला—बीमार पड़ जाता है, तो नियमित आय बंद हो जाती है। चेक-अप के लिए शहरों या बड़े अस्पतालों के बार-बार चक्कर लगाने और देखभाल करने वाले (अटेंडेंट) को रखने की ज़रूरत से अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज न होने पर, इमरजेंसी के समय लिए गए लोन से आर्थिक बर्बादी हो सकती है।
‘आयुष्मान भारत’: आम आदमी के लिए आर्थिक संकट से बचाव का कवच
महंगे इलाज के दौर में, केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए जीवन रक्षक साबित हो रही है। पात्र परिवारों को सालाना ₹5 लाख तक का पूरी तरह से मुफ्त और कैशलेस इलाज मिलता है। इस योजना के तहत शामिल अस्पताल बहुत महंगे इलाज—जैसे एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और ओपन-हार्ट बाईपास सर्जरी—बिना किसी खर्च के करते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि पैसे की कमी के कारण गरीबों को इलाज से वंचित न रहना पड़े।
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दिल की सेहत बनाए रखना: बचाव का सबसे अच्छा तरीका
इलाज पर लाखों रुपये खर्च करने से कहीं बेहतर है कि बीमारी को होने ही न दिया जाए। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां बिना किसी शुरुआती लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। तीस साल की उम्र के बाद, साल में कम से कम एक बार बेसिक हेल्थ चेक-अप जरूर करवाएं। अपने खाने में नमक, चीनी और तैलीय चीजों का सेवन कम करें। धूम्रपान और शराब पीने से पूरी तरह परहेज करें। रोज़ाना 30 मिनट तेज़ चलना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव कम करने के लिए योग करना लंबे समय तक दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।



