बिना जांच भारत पर लगाए आरोप, अब दुबई से सामने आया सच: यूनुस सरकार की साजिश बेनकाब
Hadi murder case: न गहनता से जांच, न ठोस साक्ष्य और दूसरे मुल्क को सीधे कटघरे में खड़ा करने की कोशिश। ढाका पुलिस की फिल्मी कहानी का असल सच दुनिया के सामने आ गया है। बांग्लादेश ने छात्र नेता उस्मान हादी हत्याकांड में फरार जिस संदिग्ध हत्यारोपी फैसल करीम मसूद के भारत में छिपे होने का ढिंढोरा पीटा था, वह आखिरकार दुबई में दुबका बैठा है। फैसल के अलावा आलमगीर शेख की भी सरगर्मी से तलाश चल रही है। बांग्लादेश के मोस्ट वांटेड अपराधी फैसल करीम मसूद ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर खुद को बेकसूर बताया है।
फैसल का दावा है कि वह भारत नहीं बल्कि दुबई में है। वीडियो संदेश में मसूद ने उस्मान हादी की हत्या में किसी भी प्रकार से शामिल होने से साफ इनकार किया है। उस्मान और फैसल के बीच व्यापारिक रिश्ते होने की बात सामने आई है। वीडियो संदेश में फैसल का कहना है कि उस्मान की हत्या के पीछे जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र शाखा छात्र शिबिर के सदस्य शामिल हो सकते हैं। फैसल करीम का यह कबूलनामा ढाका पुलिस को बेनकाब करने का सबसे पुख्ता प्रमाण है।
हादी के भाई ने सरकार पर लगाए थे गंभीर आरोप
इसके पहले उस्मान हादी के भाई ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि फरवरी में प्रस्तावित आम चुनाव को टालने के मकसद से उस्मान की हत्या कराई गई है। कुछ दिन पहले उस्मान हादी की हत्या ने समूचे बांग्लादेश को हिला दिया था। इस हत्याकांड में आलमगीर शेख और फैसल करीम मसूद फरार चल रहे हैं।
बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल बनाने के उद्देश्य से निरंतर दावा किया जा रहा है कि फरार आलमगीर और फैसल करीम भारत के मेघालय में छिपे हैं। दोनों को भारत ने संरक्षण दे रखा है। उस्मान हादी की हत्या के बाद से बांग्लादेश में मॉल लिंचिंग में हिंदू समुदाय के दो युवकों को मौत के घाट तक उतारा जा चुका है। इसके चलते दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट आई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय और मेघालय पुलिस द्वारा उस्मान हादी के हत्यारोपियों को संरक्षण न देने का बयान जारी करने के बावजूद यूनुस सरकार की मंशा नहीं बदली है। बांग्लादेश में अपनी कुर्सी बचाने की खातिर अंतरिम सरकार के मुखिया ने बड़ी साजिश रची है। सत्रह साल बाद स्वदेश लौटे दिवंगत पीएम खालिदा जिया के बेटे रहमान को बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री माना जा रहा है।
हालांकि रहमान के पीएम बनने की संभावना ने वहां के अल्पसंख्यक समुदायों की बेचैनी बढ़ा दी है। चूंकि खालिदा जिया की पार्टी को कट्टरपंथी संगठनों का हितैषी माना जाता है। उधर, भारत-बांग्लादेश में बढ़ते तनाव पर एआईएमआईएम चीफ एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा बयान दिया है। ओवैसी ने कहा है कि बांग्लादेश में चीन व आईएसआई सक्रिय है। ऐसे में भारत के समक्ष चुनौतियां बढ़ रही हैं।
बांग्लादेश में उस्मान हादी आज हैं बड़ा नाम
उन्होंने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश में लोकतंत्र की बहाली होने पर स्थितियां बेहतर हो सकेंगी। वहीं, बांग्लादेश में उस्मान हादी आज बड़ा नाम बन चुका है। दरअसल शेख हसीना का तख्तापलट करने के लिए जो राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया गया था, उसमें उस्मान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
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नई सरकार आने पर उस्मान का राजनीतिक कद और बढ़ना तय था, मगर उसके विरोधियों को यह रास नहीं आया। इस बहुचर्चित हत्याकांड की निष्पक्ष जांच होने की फिलहाल कोई संभावना दिखाई नहीं दे रही है। माना जाता है कि अंतरिम सरकार ने अपने विरोधियों को रास्ते से हटाने के लिए यह पूरा खेल खेला है।



