उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व विधायक को मिली जमानत, सदमे में पूरा परिवार

Kuldeep Singh Sengar: समाज में रसूखदार अपराधियों का खौफ कैसा होता है, उन्नाव रेप केस की पीड़िता का डर इसका ताजा उदाहरण है। पीड़िता का परिवार एक बार फिर दहशत के साए में आ गया है। उन्हें कोई नई अनहोनी होने की चिंता सता रही है। पीड़िता व उसके परिजनों की बेचैनी बढ़ गई है। रात की नींद गायब है। डरे-सहमे परिवार को अपनी पीड़ा जाहिर करनी पड़ी है। दिल्ली हाईकोर्ट से पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को जमानत मिलने के बाद से पीड़ित परिवार काफी निराश व हताश है। रेप केस में फंसे कुलदीप सेंगर को उम्रकैद की सजा मिली थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे सशर्त जमानत दी है।

हालांकि सेंगर का तत्काल जेल से बाहर आना संभव नहीं हैं। चूंकि पीड़िता के पिता की हत्या के आरोप में भी वह दस साल की सजा काट रहा है। यूपी में कुछ साल पहले उन्नाव रेप केस ने तहलका मचा दिया था। पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर के कृत्य पर सियासत खूब गरमाई थी। दरअसल रेप केस पीड़िता के ताऊ और पिता की भी मौत हो गई थी।

आरोप है कि Kuldeep Singh Sengar ने पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए अपने रसूख का भरपूर इस्तेमाल किया था। सियासत में मजबूत पकड़ होने के कारण वह बेलगाम हो चुका था। शातिर अपराधी कुलदीप सेंगर द्वारा ढहाए गए जुल्म के दर्द से पीड़ित परिवार अब तक उबर नहीं सका है। लिहाजा असरदार रेपिस्ट के जेल से बाहर आने की संभावना ने पीड़िता व उसके परिवार को को सदमे में ला दिया है।

बहन ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जाहिर की

पीड़िता की बहन ने अदालत के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। उसने यह तक कहा है कि हम सुरक्षित नहीं हैं। यदि आरोपी बाहर रहेगा तो हमे जेल में डाल दीजिए। कम से कम जान तो बची रहेगी। खौफजदा परिवार को दिल्ली में इंडिया गेट के पास धरना भी देना पड़ा है। वैसे कुलदीप सेंगर जैसे अपराधी राजनीति की आड़ में समाज के भीतर मनमानी करते रहे हैं।

रसूख व दौलत के दम पर वह न सिर्फ कानून के साथ खिलवाड़ करते हैं बल्कि बहन-बेटियों की अस्मत से खेलने से भी नहीं डरते। देश की राजनीति को अपराधियों से मुक्त करना आसान नहीं है। संसद और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं में दागी व चरित्रहीन जनप्रतिनिधियों की संख्या कम नहीं है।

दागी जनप्रतिनिधियों पर हत्या, हत्या का प्रयास, रंगदारी के लिए धमकाने, बलात्कार, बलात्कार का प्रयास, संपत्ति कब्जाने, जान से मारने की धमकी देने जैसे संगीन आरोप लगे हैं। दरअसल राजनीति ऐसा क्षेत्र है, जहां दागी आसानी से दूध के धुले बन जाते हैं। सत्ता का संरक्षण मिलने पर पुलिस भी उन पर हाथ डालने से कतराती है।

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संयोग देखिए कि हाल ही में बुलंदशहर गैंगरेप केस में अदालत का बड़ा फैसला आया है। कोर्ट ने पांच आरोपियों को अंतिम सांस तक जेल में रहने का फैसला दिया था। इसी दौरान कुलदीप सेंगर को उम्रकैद के मामले में राहत मिलने की खबर सामने आई है। बुलंदशहर की घटना ने लगभग नौ साल पहले पूरे यूपी में सनसनी फैला दी थी। पीड़ित परिवार उस समय गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी में रहता था।

गाजियाबाद से शाहजहांपुर जाते वक्त बुलंदशहर में मां-बेटी के साथ आरोपियों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। रेप या गैंगरेप पीड़िता के दर्द को समझना आसान नहीं है। वह ताउम्र जिस पीड़ा से गुजरती है, उसे सिर्फ उसका परिवार समझ सकता है। महिलाओं के प्रति इस प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए नागरिकों को आगे आना होगा।

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