शत्रुघ्न सिन्हा ने बागियों को दिया ठेंगा! ऐन वक्त पर ममता बनर्जी के लिए लिया ऐसा फैसला, हिल गई बीजेपी!

will Not Abandon Mamata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव ला दिया है। भाजपा को मिले मजबूत जनादेश के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के कई सांसद और विधायक अलग रास्ता चुन चुके हैं। इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच टीएमसी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कर दिया है कि वह ममता बनर्जी के साथ बने रहेंगे।

विधायकों और सांसदों में बढ़ी नाराजगी

चुनाव में मिली बड़ी हार के बाद टीएमसी को संगठनात्मक स्तर पर झटका लगा है। विधानसभा में 64 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में नया गुट बना लिया है। इसके साथ ही ऋतब्रत बनर्जी नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में आ गए हैं।

संसद में भी पार्टी की स्थिति कमजोर होती दिखाई दे रही है। ममता बनर्जी की कभी करीबी मानी जाने वाली काकोली घोष के नेतृत्व में कई सांसद नए समूह के साथ जुड़ गए हैं। इस समूह में सायोनी घोष और यूसुफ पठान समेत करीब 19 सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा ने किया बगावत से इनकार

हाल के दिनों में यह चर्चा थी कि शत्रुघ्न सिन्हा भी बागी सांसदों के साथ जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

आसनसोल से सांसद सिन्हा ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि कठिन समय में ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था। इसलिए ऐसे दौर में उनका साथ छोड़ना सही नहीं होगा। उन्होंने कहा कि टीएमसी और ममता बनर्जी के प्रति उनकी जिम्मेदारी है और वह पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।

सिन्हा ने याद दिलाया कि 2019 में पटना साहिब लोकसभा सीट हारने के बाद ममता बनर्जी ने उन पर भरोसा जताया था। बाद में उन्होंने आसनसोल से उम्मीदवार बनाकर उन्हें लोकसभा पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि बागी सांसदों की सूची पर उनके हस्ताक्षर होने के दावे पूरी तरह गलत हैं।

राज्यसभा से भी इस्तीफों का सिलसिला

उधर टीएमसी को राज्यसभा में भी झटका लगा है। पार्टी के सांसद प्रकाश चिक बराइक ने गुरुवार को राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। उनके अनुसार पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया है और उसी का सम्मान करते हुए उन्होंने यह फैसला लिया।

इस सप्ताह पार्टी छोड़ने वाले सांसदों में बराइक तीसरे नेता हैं। उनसे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी टीएमसी से अलग हो चुके हैं।

भाजपा के जनादेश का हवाला

राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन को इस्तीफा सौंपने के बाद बराइक ने मीडिया से कहा कि राज्य की जनता ने भाजपा के समर्थन में फैसला सुनाया है जबकि टीएमसी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक फैसले का सम्मान करना जरूरी है और इसी वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया।

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अपने त्यागपत्र में बराइक ने राज्यसभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का अनुरोध भी किया है।

टीएमसी के सामने बड़ी चुनौती

चुनावी हार के बाद लगातार हो रही टूट ने टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एक ओर कई नेता पार्टी से दूरी बना रहे हैं तो दूसरी ओर शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कुछ वरिष्ठ चेहरे अब भी ममता बनर्जी के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस संकट से कैसे उबरती है।

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