नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान: 3 पूर्व पीएम की कहानी, जो बताती है ‘सत्ता की गारंटी’ कुछ नहीं

इमरान खान, शेख हसीना और केपी शर्मा ओली। भारत के पड़ोसी देशों के इन तीन दिग्गज राजनेताओं का बुरा वक्त खत्म नहीं हो सका है। तीनों राजनीतिज्ञ बेहद खराब दौर से गुजरने को मजबूर हैं। सियासत में अच्छे दिन कब तक रहेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं होती। विरोधी कब धोबी पटका देकर हावी हो जाएं, कोई नहीं जानता। इसलिए सियासत में हमेशा चौकन्ना रहना पड़ता है। विरोधियों को सिर्फ अच्छे मौके का इंतजार होता है।
क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान लंबे समय से जेल में बंद हैं। खान की रिहाई की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आती। कुछ दिन पहले जेल में इमरान की हत्या होने की खबर सामने आई थी। समूचे पाकिस्तान में यह खबर जंगल में आग की भांति फैल गई। ऐसे में पूर्व पीएम के परिजनों, शुभचिंतकों और पीटीआई कार्यकर्ताओं के होश उड़ गए। पीटीआई इमरान खान की पार्टी है।
अफगानिस्तान से उड़ी थी हत्या की खबर
खान की हत्या की खबर अफगानिस्तान से उड़ी थी। इसके बाद उनके परिजनों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर बखेड़ा खड़ा कर दिया। शुक्र है कि इमरान सही सलामत हैं। भाई इमरान से जेल में मुलाकात करने के बाद बहन ने यह गुड न्यूज सुनाकर पूर्व पीएम के समर्थकों की बेचैनी दूर की। वैसे पाकिस्तान की शहबाज सरकार और आर्मी प्रमुख असीम मुनीर के लिए इमरान गले की हड्डी बन चुके हैं। जिन्हें न निगला जा सकता है, न उगला।
शहबाज सरकार और आर्मी प्रमुख को इस बात का अहसास हो चुका है कि जेल के भीतर इमरान के साथ कोई अप्रिय घटना होने का परिणाम घातक होगा। इससे देशभर में हिंसा भड़कने की संभावना है। हालांकि इमरान को राहत मिलने के आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं। बात अब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की। बांग्लादेश से जान बचाकर भागने के बाद से उन्हें भारत में शरण लेनी पड़ रही है।
पिछले दिनों एक ट्रिब्यूनल ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। फिलहाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की कमान मोहम्मद युनूस ने संभाल रखी है। आरोप है कि युनूस के इशारे पर शेख हसीना को फांसी की सजा देने का निर्णय लिया गया है। बांग्लादेश में ट्रिब्यूनल के इस फैसले का निरंतर विरोध हो रहा है। हसीना लंबे समय तक पीएम पद पर रही हैं। उनके कार्यकाल के दौरान मुल्क ने काफी प्रगति की थी। अर्थव्यवस्था के मामले में भी बांग्लादेश ने पाकिस्तान को पीछे छोड़ दिया था, मगर विरोधियों ने मौका मिलने पर हसीना को देश छोड़ने को मजबूर कर दिया।
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उधर, नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भी विदेश में रहकर गुजर-बसर करने को विवश हैं। बांग्लादेश की तर्ज पर नेपाल में भी जेन जी आंदोलन के कारण ओली को सत्ता से बाहर होना पड़ा था। चीन की सरपरस्ती में रहकर ओली नेपाल को संभाल रहे थे। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के ओली सरकार के फैसले ने युवाओं को गुस्से से भर दिया था।
बहरहाल इमरान खान, शेख हसीना और केपी शर्मा ओली जैसे राजनेता इस बात का उदाहरण हैं कि सियासत हर किसी को रास नहीं आती है। सफलता के शिखर से व्यक्ति कब नीचे आ गिरे, कोई नहीं बता सकता है। सत्ता में बदलाव के बाद से पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में हालात ज्यादा अच्छे नहीं हैं। पाकिस्तान और बांग्लादेश में आतंकवादियों और कट्टरपंथी ताकतों को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।



