निषादराज की सेवा-केवट संवाद की अमृत कथा सुन भक्त हुए मंत्रमुग्ध
रामकथा के चौथे दिन भी भक्तों की उमड़ी भीड़

जसवंतनगर,इटावा। जसवंतनगर विकास खण्ड के ग्राम कैस्त में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने भक्ति,भावना और आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण प्रसंगों का रसपान किया। कथा वाचक आचार्य मुनेंद्र दुबे ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग, निषादराज की सेवा भावना तथा केवट संवाद की अमृतमयी कथा का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया।
आचार्य दुबे ने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, सेवा, करुणा और आदर्श जीवन का प्रतीक है। निषादराज और केवट जैसे पात्र यह संदेश देते हैं कि सच्ची भक्ति और सेवा का कोई जाति या वर्ग नहीं होता, बल्कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल प्रेम, विनम्रता और हृदय की पवित्रता से होकर जाता है। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने समाज के प्रत्येक वर्ग को सम्मान देकर मानवता का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।
कथा के दौरान ‘जय श्रीराम’ के उद्घोषों से वातावरण गूंज उठा। श्रद्धालु कथा के दिव्य प्रसंगों को सुनते-सुनते भावविभोर हो उठे और कई भक्तों की आंखें भक्ति रस से नम हो गईं। कथा स्थल पर भक्ति संगीत और भजन की मधुर ध्वनियों ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।
कथा आयोजन समिति की प्रमुख श्रीमती रामरानी विजय शंकर प्रजापति ने बताया कि इस कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं,बल्कि समाज में शांति,सद्भाव और एकता का संदेश फैलाना है। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प है कि वे विभिन्न स्थानों पर सात राम कथाओं का आयोजन कर समाज में भक्ति, प्रेम और सकारात्मक सोच का संचार करेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि इन आयोजनों से लोगों में आध्यात्मिक जागृति के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी बल मिलेगा।



