gst 2.0 reforms: जानिए क्यों पेट्रोल-डीजल अभी भी GST से बाहर

वस्तु एवं सेवा कर परिषद ने 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले व्यापक जीएसटी सुधारों को मंजूरी दी है। जानिए नई दो-स्लैब कर प्रणाली, खाद्य, आवास, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा क्षेत्र पर इसका असर और क्यों पेट्रोल-डीजल अभी भी जीएसटी से बाहर हैं।

gst 2.0 reforms: वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने सोमवार 22 सितंबर 2025 से लागू होने वाले व्यापक सुधारों को मंजूरी दे दी है। ये सुधार देश की प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों जैसे खाद्य, आवास, ऑटोमोबाइल, कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा पर बड़ा प्रभाव डालेंगे। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई परिषद की 56वीं बैठक के बाद ये बदलाव घोषित किए गए।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जरूरी और दैनिक उपयोग की वस्तुएं सबसे अधिक लाभान्वित होंगी। साथ ही घरेलू उपकरण जैसे एयर-कंडीशनर, 32 इंच से बड़े टेलीविजन और डिशवॉशर की दरों में भी कटौती होगी। निर्माण क्षेत्र और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को भी राहत दी गई है।

हालांकि, पेट्रोल और डीजल को अभी भी जीएसटी के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इसका कारण यह है कि ये दोनों वस्तुएं केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए प्रमुख राजस्व स्रोत हैं। संयुक्त कर दरें 100 प्रतिशत से अधिक होने के कारण दोनों स्तर की सरकारें इन पर कर कम करने में हिचकिचा रही हैं।

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फाइनेंस मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक समाचार चैनल से कहा कि हमने जानबूझकर पेट्रोल और डीजल को इस प्रस्ताव से बाहर रखा है। कानूनी रूप से तैयारी पूरी है, लेकिन यह निर्णय राज्यों को लेना होगा।

मौजूदा वक्त में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र उत्पाद शुल्क और राज्य वैट लागू होता है। कई राज्य इन करों पर अपनी निर्भरता रखते हैं। यदि ईंधन को जीएसटी में लाया गया तो राज्यों की कराधान नीति और मूल्य नियंत्रण प्रभावित होगा।

आपको बता दें कि gst 2.0 reforms में 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो स्लैब कर प्रणाली पेश की गई है। इससे व्यवसायों के लिए आसानी होगी और आम लोगों के लिए वस्तुओं की लागत कम होगी।

 

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