पांच देशों के 21 स्वास्थ्य अधिकारियों ने सीएमओ कार्यालय में की बैठक, कैलाभट्टा-विजयनगर और डासना में टीकाकरण व्यवस्था की जानकारी ली

गाजियाबाद। डूंडाहेड़ा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के नमूने में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस (वीडीपीवी) टाइप-1 मिलने के करीब दो महीने बाद बुधवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम गाजियाबाद पहुंची। टीम ने जिले में पोलियो उन्मूलन अभियान, टीकाकरण व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों का जायजा लिया।

डब्ल्यूएचओ की टीम ने सबसे पहले सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद टीम कैलाभट्टा, विजयनगर और सीएचसी डासना पहुंची। यहां स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से टीकाकरण अभियान, पोलियो ड्रॉप्स और सर्वे से संबंधित जानकारी ली गई।

पांच देशों के 21 अधिकारी टीम में शामिल

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नीरज अग्रवाल और डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अभिषेक के अनुसार, टीम में नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और तिमोर-लेस्ते के कुल 21 स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। टीम ने ई-वैक्‍सीन स्टोर का भी निरीक्षण किया और टीकों के रखरखाव, भंडारण तथा उनकी आपूर्ति व्यवस्था की जानकारी हासिल की।

अधिकारियों के मुताबिक, टीम गाजियाबाद में चलाए गए पोलियो अभियान की योजना और कार्यप्रणाली को करीब से समझ रही है, ताकि सफल व्यवस्थाओं को अपने-अपने देशों में भी लागू किया जा सके।

डेढ़ लाख बच्चों का किया गया सर्वे

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 5 जून 2026 को डूंडाहेड़ा एसटीपी के नमूने में वीडीपीवी टाइप-1 की पुष्टि हुई थी। इसके बाद शासन स्तर पर बैठक कर जिले के 12 अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर सर्वे और विशेष टीकाकरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।

विजयनगर, कैलाभट्टा, राजनगर, घूकना समेत अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में 100 से अधिक टीमों को डोर-टू-डोर सर्वे के लिए लगाया गया। अभियान के दौरान शून्य से पांच वर्ष तक की आयु के करीब डेढ़ लाख बच्चों का विवरण तैयार किया गया। सर्वे में करीब एक हजार बच्चे ऐसे मिले, जिन्हें पोलियो की खुराक या नियमित टीकाकरण से वंचित पाया गया।

छह लाख से अधिक बच्चों को पिलाई गई पोलियो की दवा

स्वास्थ्य विभाग की ओर से 28 जून को विशेष पोलियो अभियान चलाया गया था। इस दौरान जिले में छह लाख से अधिक बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई गई। पूरे अभियान की निगरानी राज्य स्तरीय अधिकारियों और डब्ल्यूएचओ विशेषज्ञों द्वारा की गई।

डब्ल्यूएचओ की टीम का यह दौरा जिले में पोलियो निगरानी व्यवस्था, टीकाकरण कवरेज और संवेदनशील क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों के आकलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है

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