11 कुंडीय विश्वकल्याण महायज्ञ का भव्य समापन

भरथना,इटावा। आर्य समाज मंदिर भरथना में आयोजित वेद प्रचार कार्यक्रम के अंतर्गत चल रहे विश्वकल्याण महायज्ञ एवं वेद कथा की अमृतवर्षा कार्यक्रम का 11 कुंडीय विश्वकल्याण महायज्ञ के साथ भव्य समापन हुआ। नर्मदापुर, मध्य प्रदेश से पधारे आचार्य मोहन आर्य ‘श्रुतबन्धु’ ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महायज्ञ संपन्न कराया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर राष्ट्र एवं विश्व कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर आचार्य मोहन आर्य ने कहा कि इस तरह के वैदिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर होते रहना चाहिए। ऐसे आयोजनों के माध्यम से मनुष्य को वेदों में ईश्वर द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि वैदिक विचारधारा मनुष्य को दुर्गुणों और दुर्व्यसनों से दूर रखते हुए सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं वैदिक आयोजनों का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से मनुष्य के जीवन में संस्कार, सदाचार और सेवा की भावना विकसित होती है। ऐसे आयोजन समाज को उत्तम जीवन जीने तथा श्रेष्ठ मनुष्य बनने की प्रेरणा देते हैं।
11 कुंडीय महायज्ञ में भगवान दास आर्य, देवेंद्र भंशाली आर्य, सुरेश आर्य, अजय आर्य, अरुण आर्य, अनिल आर्य, नंदकिशोर आर्य, सतेंद्र आर्य, पं. राजेश आर्य, सत्यभान आर्य, राजकमल आर्य, रामलखन आर्य, सीता देवी आर्या, उषा आर्या, आरती आर्या, अनुराग आर्य, वैभव आर्य, मोहन आर्य और रोहित भंशाली सहित आर्य समाज के सदस्यों एवं करीब दो सैकड़ा श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति दी।



