Women Quota Bill: महिला आरक्षण बिल फेल होने पर सरकार ने दो-टूक जवाब देकर विरोधियों को कराया चुप

Women Quota Bill: लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू करने की कोशिश को बड़ा झटका लगा। संविधान संशोधन के इस प्रस्ताव को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका। मतदान में 298 सांसदों ने समर्थन किया जबकि 230 सांसदों ने विरोध में वोट दिया। परिणामस्वरूप यह विधेयक सदन में पारित नहीं हो पाया।

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सरकार ने अगले ही दिन विस्तृत सवाल-जवाब (FAQ) जारी कर अपनी योजना और सोच को स्पष्ट करने की कोशिश की।

सरकार ने तुरंत बदलाव क्यों जरूरी माना

सरकार का कहना है कि मौजूदा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत महिला आरक्षण जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू हो सकता था। अगर सरकार उसी प्रक्रिया का इंतजार करती तो 2029 के आम चुनाव में महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाता।

इसी वजह से 16 अप्रैल 2026 को तीन अलग-अलग विधेयक पेश किए गए ताकि महिला आरक्षण को जनगणना की शर्त से अलग किया जा सके।

लोकसभा सीटें बढ़ाकर नया ढांचा बनाने का प्रस्ताव

सरकार ने तर्क दिया है कि जनसंख्या बढ़ने के साथ संसदीय सीटों में भी बढ़ोतरी जरूरी है। 1971 में जब देश की आबादी लगभग 54 करोड़ थी तब लोकसभा सीटें 550 तय की गई थीं। अब आबादी करीब 140 करोड़ हो चुकी है इसलिए 850 सीटों का सुझाव दिया गया।

इसके साथ ही सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों में 50 प्रतिशत समान वृद्धि की बात कही गई ताकि किसी राज्य के प्रतिनिधित्व पर असर न पड़े।

दक्षिणी राज्यों की चिंता पर सरकार की सफाई

परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में प्रतिनिधित्व घटने की आशंका जताई जाती रही है। सरकार ने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि अभी दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी 23.76 प्रतिशत है। नए प्रस्ताव में यह थोड़ा बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो सकती थी।

सरकार का दावा है कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को नुकसान नहीं होगा और उनका प्रतिनिधित्व संतुलित रहेगा।

एससी और एसटी प्रतिनिधित्व में संभावित बढ़ोतरी

सीटों की संख्या बढ़ने की स्थिति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें भी बढ़ जाएंगी। इससे संसद में इन वर्गों की भागीदारी और मजबूत होने की संभावना है।

जाति जनगणना पर सरकार का पक्ष

विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को सरकार ने खारिज किया है कि जाति जनगणना को टाला जा रहा है। सरकार का कहना है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जातिगत आंकड़ों का संग्रह जारी है।

मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर स्पष्ट रुख

सरकार ने साफ किया है कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है। आरक्षण केवल सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर दिया जाता है।

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केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग व्यवस्था

दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में अलग प्रशासनिक ढांचे के कारण महिला आरक्षण लागू करने के लिए अलग संशोधन कानून की आवश्यकता बताई गई।

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