दुनिया देखती रह गई और भारत ने मार ली बाजी! गैस सप्लाई के संकट के बीच मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक
Indias Gas Import 2026: अमेरिका-ईरान संघर्ष और वैश्विक एलएनजी संकट के बीच भारत ने सस्ती प्राकृतिक गैस की खरीद बढ़ाई। जानें कीमतों में गिरावट, आयात और ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर।

Indias Gas Import 2026: दुनिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने कई देशों की गैस सप्लाई को प्रभावित किया है। इसका असर भारत पर भी पड़ा, लेकिन हालात बदलने के साथ भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ती प्राकृतिक गैस की खरीद फिर तेज कर दी है। इससे घरेलू उद्योग और ऊर्जा जरूरतों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सस्ती कीमतों ने बढ़ाई भारत की खरीद
अंतरराष्ट्रीय स्पॉट मार्केट में प्राकृतिक गैस की कीमतें हाल ही में एक महीने के निचले स्तर पर आ गईं। इसी मौके का फायदा उठाते हुए भारत की सरकारी कंपनियों ने बड़ी मात्रा में खरीदारी की है।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, गेल इंडिया लिमिटेड और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने अप्रैल से जून डिलीवरी के लिए लगभग 16 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट की दर पर गैस खरीदी है। यह सौदे 15 अप्रैल को बंद हुई ट्रेडिंग में हुए।
इससे पहले ऊंची कीमतों की वजह से भारतीय खरीदारों ने स्पॉट मार्केट में खरीद लगभग रोक दी थी।
युद्ध और सप्लाई बाधा से बिगड़ा वैश्विक बाजार
अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। वहीं कतर में दुनिया के बड़े एलएनजी प्लांट में भी रुकावट आई।
इन घटनाओं से वैश्विक गैस सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ। इसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखा और एलएनजी डिलीवरी में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
कीमतों में उतार-चढ़ाव से बदली खरीद नीति
संघर्ष शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें अचानक बढ़कर दोगुनी हो गई थीं। उस समय दरें लगभग 25 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू तक पहुंच गई थीं।
महंगी कीमतों के कारण भारत ने कई स्पॉट खरीद सौदे रोक दिए थे। लेकिन अब कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसी वजह से एक बार फिर खरीदारी बढ़ने लगी है।
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भारत की ऊर्जा जरूरत और आयात पर निर्भरता
भारत लंबे समय से गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है ताकि प्रदूषण कम किया जा सके। लेकिन देश अभी भी अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत गैस आयात करता है। साल 2024 में भारत का प्राकृतिक गैस आयात लगभग 35 हजार क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया था। इस साल की शुरुआत में आपूर्ति में कुछ कमी भी देखने को मिली। भारत मुख्य रूप से कतर, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका जैसे देशों से गैस आयात करता है।



