ट्रंप के नए बयान ने मचाई सनसनी, खुद को बताया UN
Thailand Cambodia Ceasefire: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी कूटनीतिक सूझ-बूझ का परिचय देते हुए दावा किया है कि उनकी पहल से थाईलैंड और कंबोडिया के बीच चल रहे संघर्ष को अस्थाई रूप से समाप्त किया गया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म “ट्रुथ सोशल” पर किए गए पोस्ट में ट्रंप ने दोनों देशों के नेताओं को संघर्ष विराम समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए बधाई दी और इसे एक “तेज, निर्णायक और न्यायपूर्ण परिणाम” बताया।
कूटनीतिक विजेता के रूप में ट्रंप की छवि
ट्रंप का कहना था कि थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों ने एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई है और वे अब अपने मूल समझौतों के तहत शांति की दिशा में आगे बढ़ेंगे। उन्होंने इसे दोनों देशों के नेताओं की “समझदारी और दूरदर्शिता” का परिणाम बताया। ट्रंप का दावा था कि अमेरिका ने यह फिर से साबित किया है कि वह दुनिया में शांति स्थापित करने में अपनी अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रति हमला और ट्रंप का नजरिया
इसी कड़ी में अमेरिकी प्रेसिडेंट ने यह भी कहा कि अमेरिका अब “असली संयुक्त राष्ट्र” बन चुका है, क्योंकि उन्होंने पिछले 11 महीनों में आठ से ज्यादा संघर्षों को सुलझाया या रुकवाया है। इसके साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल उठाया, दावा करते हुए कहा कि कई बड़े संघर्षों में यूएन की भूमिका काफी सीमित रही है। ट्रंप के इस बयान को वैश्विक कूटनीति में अमेरिका की प्रमुख भूमिका को उजागर करने के रूप में देखा जा रहा है।
क्या यह संघर्ष विराम टिकाऊ होगा?
हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या यह संघर्ष विराम लंबे समय तक कायम रहेगा, क्योंकि दोनों देशों के बीच पहले भी संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, मगर कुछ सप्ताह पहले ही दोनों देशों ने उस समझौते को तोड़ते हुए एक-दूसरे पर हमले शुरू कर दिए थे। इस हमले के कारण कई लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे। अब ट्रंप इसे अपनी कूटनीतिक सफलता मान रहे हैं, मगर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शांति बनी रहती है तो यह एक वास्तविक सफलता होगी, अन्यथा यह सिर्फ एक अस्थायी समाधान हो सकता है।
यूक्रेन-रूस संघर्ष और ट्रंप की कूटनीतिक सक्रियता
यह बयान उस समय आया है जब अगले दिन ट्रंप की मुलाकात यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से होने वाली है, जिसमें यूक्रेन-रूस संघर्ष के समाधान के लिए विभिन्न शांति प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। ऐसे में यह देखा जा रहा है कि क्या ट्रंप की कूटनीतिक छवि को इस नई शांति प्रक्रिया से और मजबूती मिल सकती है।
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भारत-पाकिस्तान और अन्य संघर्षों में ट्रंप की भूमिका
ट्रंप के शांति प्रयासों में एक और विवादास्पद दावा भारत-पाकिस्तान के संदर्भ में भी सामने आया है। उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को व्यापारिक दबाव के जरिए युद्ध से रोका था, हालांकि भारत ने इस दावे को कई बार नकारा किया है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या उनके अन्य दावों की तरह, यह दावा भी महज एक कूटनीतिक बयान है, या सचमुच इसमें कुछ ठोस परिणाम हैं।



