दिवाली पर डायबिटीज मरीज बेफिक्र होकर खाएं ये 5 मिठाइयां, डॉक्टर ने बताई सबसे सेफ और सबसे खतरनाक स्वीट्स की लिस्ट

sweets for diabetes patients on diwali: रोशनी के त्योहार दीपावली पर स्वादिष्ट पकवानों और मिठाइयों का लुत्फ उठाना हर किसी को पसंद होता है, मगर डायबिटीज के मरीजों के लिए यह मिठास अक्सर चिंता का कारण बन जाती है। ब्लड शुगर बढ़ने के डर से कई लोग मन मारकर रह जाते हैं या इस उलझन में रहते हैं कि थाली में रखी कौन सी मिठाई उनकी सेहत के लिए सुरक्षित है। यदि आप भी त्योहार के जश्न में बिना किसी खौफ के मुंह मीठा करना चाहते हैं, तो मशहूर डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद त्रिपाठी की यह खास गाइड आपके बहुत काम आने वाली है। उन्होंने लोकप्रिय पारंपरिक मिठाइयों को उनके ग्लाइसेमिक प्रभाव के आधार पर तीन श्रेणियों- लो रिस्क, मॉडरेट रिस्क और हाई रिस्क में बांटा है, ताकि आप सही और सेहतमंद विकल्प चुन सकें।
खाएं ये मिठाइयां
सबसे सुरक्षित यानी ‘लो रिस्क’ कैटेगरी में डॉक्टर ने ड्राई फ्रूट्स रोल, ड्राई फ्रूट्स लड्डू और अंजीर रोल को रखा है। इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) महज 40 से 45 के आसपास होता है। इनमें भरपूर मात्रा में प्राकृतिक फाइबर और हेल्दी नट्स मौजूद होते हैं, जो रक्त में ग्लूकोज के अवशोषण को धीमा कर देते हैं और ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने नहीं देते। इसके अलावा काजू कतली और बादाम कतली भी सीमित मात्रा में एक सुरक्षित विकल्प मानी गई हैं, क्योंकि इनमें मौजूद ड्राई फ्रूट्स शुगर स्पाइक को रोकते हैं। वहीं पारंपरिक बेसन के लड्डू को भी मरीज सीमित मात्रा में अपनी प्लेट में शामिल कर सकते हैं, क्योंकि चने के बेसन का जीआई कम होता है और शुद्ध देसी घी चीनी के एब्जॉर्प्शन की गति को धीमा कर देता है।
दूसरी श्रेणी ‘मॉडरेट रिस्क’ वाली मिठाइयों की है, जिन्हें बेहद नपी-तुली मात्रा में कभी-कभार ही चखा जा सकता है। इस सूची में रवा लड्डू, चूरमा लड्डू, नारियल की बर्फी और मैसूर पाक जैसी मिठाइयां शामिल हैं। इन मिठाइयों को तैयार करने में शुद्ध देसी घी का इस्तेमाल होता है, जिससे शरीर में चीनी धीरे-धीरे घुलती है। यदि आपके पास नट्स या ड्राई फ्रूट्स से बनी मिठाइयों का विकल्प मौजूद नहीं है, तो आप इनमें से एक छोटा टुकड़ा खा सकते हैं, मगर इसकी मात्रा पर सख्त नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है।
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तीसरी और सबसे अहम श्रेणी ‘हाई रिस्क’ की है, जिससे शुगर के मरीजों को पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इस लिस्ट में सबसे ऊपर जलेबी और इमरती हैं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत तक सीधी चीनी की चाशनी होती है और एक सामान्य जलेबी में करीब 5 चम्मच चीनी घुल जाती है। मैदा और डीप-फ्राई होने के चलते इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 75 के खतरनाक स्तर को पार कर जाता है, जो खाते ही ब्लड शुगर को बेकाबू कर सकता है। इसके साथ ही चाशनी से लथपथ गुलाब जामुन, बंगाली मिठाइयां (जैसे रसगुल्ला, चमचम) और सोनपापड़ी जैसी मिठाइयों से भी सख्त परहेज की सलाह दी गई है, क्योंकि इनका सेवन डायबिटीज रोगियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।



