होर्मुज में भारत को बड़ी कामयाबी; कई भारतीय जहाज मिसाइलों से बचकर सुरक्षित निकले, 15 और जहाज कतार में

Strait of Hormuz crisis 2026: अमेरिका और ईरान के बीच हुआ संघर्ष-विराम (ceasefire) सिर्फ़ दस दिनों में ही टूट गया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर फिर से मिसाइलें दागनी शुरू कर दी हैं। नतीजतन, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)—जो दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई के लिए बहुत ज़रूरी समुद्री रास्ता है—एक बार फिर युद्ध का मैदान बन गया है, जहाँ व्यापारिक जहाजों और टैंकरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। इस भारी तनाव और युद्ध के मंडराते खतरे के बीच, भारतीय जहाज होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक गुज़रे हैं।
सुरक्षित निकलने वाले भारतीय टैंकरों की संख्या 44 हुई
पिछले 72 घंटों में, नौ टैंकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य से निकले हैं, जिनमें से सात सीधे भारत की ओर जा रहे हैं। इनमें से चार पर भारतीय झंडा लगा है, जबकि पाँच पर विदेशी झंडे लगे हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से, इस खतरनाक रास्ते से सुरक्षित गुज़रने वाले भारतीय टैंकरों की कुल संख्या 44 हो गई है। सफल जहाजों के इस समूह में 15 बल्क कैरियर, 13 LPG कैरियर, 11 कच्चे तेल (crude oil) के कैरियर और 2 LNG कैरियर शामिल हैं।
15 जहाजों का बेड़ा अभी भी फारस की खाड़ी में है
फिलहाल, 15 जहाजों का एक बेड़ा सुरक्षित रास्ते का इंतज़ार करते हुए फारस की खाड़ी में मौजूद है; इनमें से दस जहाजों पर भारतीय झंडा लगा है। ये जहाज कच्चा तेल, गैस और उर्वरक (fertilizers) लेकर जा रहे हैं।
हाल ही में, 27 जून को बल्क कैरियर ‘AJP Priti 2’ ने 65,000 टन उर्वरक लेकर इस रास्ते को पार किया, जबकि ‘Prabhu Parvati’ जहाज भी 18,732 टन का माल लेकर सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ा।
मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा; IRGC का दावा है कि ईरान ने अमेरिका के 8 मिलिट्री बेस पर किया हमला
आपको बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी इस भीषण जंग के बाद से, अब तक इस खतरनाक रूट से सुरक्षित निकलने वाले भारतीय टैंकरों की कुल संख्या 44 हो चुकी है। भले ही भारत ने अब तक अपने कई जहाजों को सुरक्षित निकाल लिया हो, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।



