रूस-यूक्रेन से लेकर सूडान तक: जानिए क्यों बढ़ रहे हैं इन देशों में युद्ध

21th century civil wars: यूक्रेन, गाजा, म्यांमार और सूडान…। दुनिया के ये चार देश लंबे समय से अशांति की चपेट में हैं। रूस-यूक्रेन तथा इजरायल-हमास के बीच जहां वॉर छिड़ी है, वहीं म्यांमार व सूडान सिविल वॉर से ग्रस्त हैं। वॉर और सिविल वॉर की वजह से असंख्य नागरिक नर्क से बदतर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। मौत का बुलावा कब आ जाए, कोई नहीं जानता। मौत आसमान से टपकेगी या जमीन पर आमना-सामना होगा, इसकी भी गारंटी नहीं है। ना दो वक्त की रोटी नसीब है, न सिर छुपाने को छत। जान बचाने के लिए प्रतिदिन भाग-भाग करनी पड़ रही है।

विकट हालात में मौत को कब तक चकमा दिया जाएगा, कुछ नहीं पता। यूक्रेन, गाजा और म्यांमार के बाद सूडान के खराब हालात की जो तस्वीरें दुनिया के सामने आई हैं, वह बेहद वीभत्स व डरावनी हैं। सड़कों पर दूर-दूर तक फैले रक्त के निशान तथा लाशों के ढेर देखकर हर कोई विचलित हो उठा है। सूडान में गृहयुद्ध के कारण आम नागरिकों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। पिछले तीन साल से यह देश गृहयुद्ध की आग में झुलस रहा है। सेना और विद्रोही संगठन आमने-सामने हैं। देश पर वर्चस्व व नियंत्रण बनाने की यह लड़ाई निर्दोष नागरिकों का खून बहा रही है।

जानकर भी अनजान हैं दुनिया के ताकतवर मुल्क

दुनिया के ताकतवर मुल्क सब कुछ जानकर भी अनजान बनकर बैठे हैं। सूडान में शांति लाने व नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। बड़ी संख्या में नागरिक पलायन कर चुके हैं। इसके इतर रूस ने एक बार फिर यूक्रेन पर भीषण हमला किया है। हमले में बड़े शहर को काफी नुकसान पहुंचा है। व्लादिमीर पुतिन व जेलेंस्की की हठ इंसानियत पर भारी पड़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भरसक कोशिशों के बावजूद रूस-यूक्रेन में शांति समझौता नहीं हो सका है। इसके अलावा इजरायल और हमास में संघर्ष विराम के बाद भी गाजा पट्टी में शांति न लौटना चिंताजनक है।

इजरायल ने हाल ही में एक सैनिक की मौत के बदले में सौ फिलिस्तीनी नागरिकों को मौत के घाट उतार कर गाजा में शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। गृहयुद्ध में उलझे म्यांमार से भी सुकून भरी कोई खबर सामने नहीं आ सकी है। वहां सेना व विद्रोही गुट में वर्चस्व की जंग निरंतर जारी है। कुछ बाहरी ताकतों के कारण यह मामला सुलझ नहीं रहा है।

भीषण जंग की गवाह बनी 21वीं सदी बनी

21वीं सदी अपना एक चौथाई सफर पूरा कर चुकी है। ये सदी अब तक कई भीषण जंग (21th century civil wars) की गवाह बन चुकी है। तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाएं जब-तब प्रबल होने लगती हैं। अधिकतर देशों की शांति को भंग करने के पीछे अमेरिका की रणनीति है। जो देश उसके इशारे पर चलने से इनकार कर देता है, वहीं पर हालात बेकाबू होने लगते हैं। वर्तमान में चीन और अमेरिका का गठजोड़ मजबूत होता दिखाई दे रहा है। डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात ने नए समीकरण बनाए हैं।

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चीन जहां अपनी विस्तारवादी नीति के लिए बदनाम है, वहीं अमेरिका का काम देश-देश में अशांति फैलाना है। यदि यह दोनों देश एक साथ आ जाते हैं तो भविष्य में दुनिया के समक्ष ज्यादा बड़ा संकट आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यूक्रेन से युद्ध में उलझने से रूस की आर्थिक व सैन्य ताकत पर प्रतिकूल असर पड़ा है। जबकि कोई बड़ा मुल्क भारत के साथ मजबूती से खड़ा होता नजर नहीं आ रहा है।

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