खर्राटे लेने वालों को हो सकती हैं ये तीन बीमारियां, हो जाएं सावधान

snoring issues: सोते वक्त खर्राटे लेना एक बहुत ही आम बात है। शायद ही कोई घर हो जहाँ कोई सदस्य खर्राटे न लेता हो। कई बार तो ये इतने ज़ोरदार होते हैं कि आस-पास के लोगों का सोना भी दूभर हो जाता है। अक्सर लोग इसे केवल एक आदत समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं, पर क्या आप जानते हैं कि यह सामान्य सी लगने वाली क्रिया आपके शरीर के लिए एक ख़तरे का संकेत हो सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ये साधारण आवाज़ें कुछ गंभीर बीमारियों की ओर इशारा करती हैं। ये समस्या किसी भी आयु वर्ग को प्रभावित कर सकती है, मगर यह कोई बीमारी नहीं है। खासकर बढ़ती उम्र के लोगों में खर्राटे लेने की प्रवृत्ति ( snoring problems) अधिक देखने को मिलती है।

गले की मांसपेशियों की ढिलाई है मुख्य कारण

रात को सोते समय साँस लेने के रास्ते में बाधा आने से खर्राटे उत्पन्न होते हैं। असल में जब हम गहरी नींद में होते हैं, तो गले और जीभ की मांसपेशियाँ शिथिल पड़ जाती हैं। इस ढिलाई के कारण साँस नली संकरी हो जाती है। जब साँस अंदर-बाहर होती है, तो यह संकरा रास्ता कंपन (Vibration) पैदा करता है, जिसे हम खर्राटे कहते हैं। कई लोगों को रात में नाक से साँस लेने में दिक्कत महसूस होती है या उनकी नाक बंद रहती है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। बुढ़ापे में मांसपेशियाँ स्वाभाविक रूप से कमज़ोर हो जाती हैं और शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण बुजुर्गों में खर्राटे अधिक आते हैं।

स्वास्थ्य की चुप्पी तोड़ती खर्राटों की आवाज़

डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, खर्राटे अक्सर अस्वस्थ जीवनशैली का परिणाम होते हैं। जो लोग नियमित व्यायाम नहीं करते, जिनका खान-पान असंतुलित है या जिनका वज़न सामान्य से अधिक है, उनमें खर्राटे लेने की समस्या ज़्यादा होती है।

दिल के रोग (हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर): युवाओं में निरंतर और तेज़ खर्राटे आना हृदय स्वास्थ्य के लिए बड़ा जोखिम पैदा करता है। खर्राटे सीधे तौर पर दिल का दौरा पड़ने या हार्ट फेलियर के ख़तरे को बढ़ाते हैं।

शुगर की समस्या (मधुमेह): खर्राटे और स्लीप एपनिया (नींद में साँस का रुकना) शारीरिक गतिविधियों और इंसुलिन के कार्य को बिगाड़ सकते हैं। इससे शरीर शर्करा (Sugar) को सही ढंग से संसाधित (Process) नहीं कर पाता है, जिससे डायबिटीज विकसित होने की आशंका बढ़ जाती है।

ब्लड प्रेशर का बढ़ना (उच्च रक्तचाप): ज़्यादा खर्राटे लेने से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है। इस कमी के कारण रक्तचाप में विकार आ सकता है और यह उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) का कारण बन सकता है। इसके अलावा, ऑक्सीजन की कमी से दिल में रक्त का प्रवाह धीमा होता है।

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खर्राटों की वजह से याददाश्त कमज़ोर होना, डिप्रेशन और सुबह उठने पर सिरदर्द जैसी अन्य समस्याएँ भी हो सकती हैं।

अच्छी नींद और चुप्पी के लिए अपनाएं ये तरीके

  • खर्राटों को नियंत्रित करना संभव है। जीवनशैली में छोटे-मोटे बदलाव लाकर आप इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
  • सोने की मुद्रा बदलें: पीठ के बल सीधा सोने के बजाय, करवट लेकर (Side Sleeping) सोने की आदत डालें।
  • कमरे में नमी बनाएँ: बेडरूम में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करें। यह गले की नमी बनाए रखने में सहायक होता है।
  • बुरी आदतों को छोड़ें: धूम्रपान और शराब का सेवन कम कर दें या पूरी तरह त्याग दें।
  • वजन पर ध्यान दें: स्वस्थ आहार और नियमित कसरत के माध्यम से शरीर का वज़न नियंत्रित रखें।
  • चिकित्सक से सलाह: यदि खर्राटों की समस्या बेहद गंभीर हो जाए और आपकी नींद को प्रभावित करे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।

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