मेवाड़ लॉ इंस्टिट्यूट में ‘समकालीन समाज में मानवाधिकार’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित

बाल अधिकारों से लेकर कैदियों के अधिकारों तक विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार, 15 विद्यार्थियों ने दीं प्रस्तुतियां

गाजियाबाद। वसुंधरा स्थित मेवाड़ लॉ इंस्टिट्यूट में ‘समकालीन समाज में मानवाधिकार’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मानवाधिकारों के संरक्षण, कानूनी जागरूकता और समकालीन समाज में अधिकारों की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी में एडवोकेट बरखा छाबड़ा ने बाल अधिकारों के संरक्षण और इस दिशा में आवश्यक नीतिगत बदलावों पर प्रकाश डाला। वहीं, मुख्य वक्ता एडवोकेट अशोक बाबू ने कैदियों और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों की विस्तार से जानकारी देते हुए न्याय व्यवस्था में मानवाधिकारों के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के दौरान बी.ए.एल.एल.बी. के 15 विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। इनमें शिक्षा का अधिकार, महिला अधिकार, पर्यावरण संरक्षण, निजता का अधिकार, स्वास्थ्य, श्रमिकों के अधिकार और अपराध पीड़ितों के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से मानवाधिकारों से जुड़े विभिन्न सामाजिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

इंस्टिट्यूट की निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल ने कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां विद्यार्थियों में शोध, तार्किक विश्लेषण और आलोचनात्मक चिंतन की प्रवृत्ति विकसित करती हैं। साथ ही, उन्हें सामाजिक समस्याओं को कानूनी दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. वियंता पाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी का संयोजन एच.एस.एस. विभाग की ओर से किया गया।

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