वक्फ कब्रिस्तान की जमीन पर दुकानों को लेकर हंगामा, महिलाओं ने किया जोरदार विरोध

नवयुग मार्केट में कब्रों के पास दुकानें रखने की तैयारी का आरोप, पुलिस मुतवल्ली और उनकी पत्नी को अपने साथ ले गई

गाजियाबाद। शहर के व्यस्त नवयुग मार्केट में पुरानी पुलिस चौकी के पास स्थित वक्फ कब्रिस्तान की जमीन को लेकर गुरुवार को विवाद गहरा गया। कब्रिस्तान परिसर में दुकानें रखने की तैयारी किए जाने के आरोप पर स्थानीय परिवारों और महिलाओं ने जमकर विरोध किया। महिलाओं ने नारेबाजी करते हुए दुकानें रखने का विरोध किया। कुछ महिलाएं जमीन पर लेट गईं। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाकर स्थिति शांत कराई और मुतवल्ली रईस अहमद अल्वी तथा उनकी पत्नी अंजुम अल्वी को अपने साथ ले गई।

दुकानें रखने की तैयारी पर भड़के लोग

स्थानीय लोगों के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 11:30 बजे मुतवल्ली अपनी पत्नी के साथ कब्रिस्तान पहुंचे थे। आरोप है कि वहां डिजिटल दुकानें रखने की तैयारी की जा रही थी। इसकी जानकारी मिलते ही आसपास रहने वाले परिवारों के लोग एकत्र हो गए और विरोध शुरू कर दिया। लोगों का आरोप है कि कब्रिस्तान की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने की कोशिश की जा रही है।

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि उनके पूर्वजों की कब्रें इसी स्थान पर हैं और उनके परिवार वर्षों से यहां रहते आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कब्रिस्तान की जमीन पर दुकानें रखने या व्यावसायिक निर्माण करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जमीन बेचने और कब्जे की साजिश का आरोप

विवादित जमीन को लेकर स्थानीय लोगों ने खसरा संख्या 752, रकबा एक बीघा एक बिस्वा और वक्फ संख्या 617 का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन को बेचने या उस पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ दुकानें पहले से तैयार हैं और उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली से लाकर कब्रिस्तान परिसर में रखने की तैयारी थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पहले भी हुआ था विरोध

स्थानीय लोगों के मुताबिक, इससे पहले 3 अक्टूबर की रात भी जमीन की कथित माप-जोख को लेकर विरोध हुआ था। लोगों ने प्रशासन से विवादित भूमि के अभिलेखों की जांच कराने और कब्रिस्तान की जमीन की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

मौके पर पहुंची पुलिस ने हंगामा शांत कराया और मुतवल्ली व उनकी पत्नी को अपने साथ ले गई। फिलहाल जमीन से जुड़े आरोपों और दुकानों को रखे जाने की वैधता पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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