सऊदी अरब का इस मुस्लिम देश पर बड़ा हमला, खूब हुई बमबारी; वजह जानें

Saudi Arabia Yemen Airstrike: मध्य पूर्व में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य टकराव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने उत्तरी यमन में हूती लड़ाकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एक बड़े रणनीतिक फ्यूल डिपो को हवाई हमले में निशाना बनाया है। सऊदी गठबंधन के आधिकारिक बयानों के मुताबिक, इस ठिकाने का उपयोग सऊदी अरब के रिहायशी हवाई अड्डों, ऊर्जा संयत्रों और लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों को ईंधन व रसद सहायता देने के लिए किया जा रहा था।
सऊदी गठबंधन की वायुसेना ने उत्तरी यमन स्थित अल-सबाहा सेंट्रल स्टेशन पर यह स्ट्राइक की, जिसकी पेट्रोलियम भंडारण क्षमता लगभग 58,000 मीट्रिक टन आंकी गई है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने बताया कि इस सैन्य कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य हूतियों की उस आपूर्ति श्रृंखला को नष्ट करना था, जिससे वे सऊदी अरब और दक्षिणी लाल सागर के समुद्री कॉरिडोर के लिए लगातार खतरा पैदा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से पहले आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने की चेतावनी जारी की गई थी। इसके उलट, हूती-नियंत्रित यमन ऑयल कंपनी ने दावा किया कि केंद्र में तेल का बड़ा स्टॉक नहीं था, जबकि हमले में दो आम नागरिकों की जान गई है और दो अन्य घायल हुए हैं।
इस हवाई हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर बड़ा जवाबी हमला बोल दिया। सऊदी रक्षा प्रणाली ने राजधानी रियाद और दक्षिणी क्षेत्रों की तरफ दागी गई तीन क्रूज मिसाइलों और दो लड़ाकू ड्रोन को हवा में ही इंटरसेप्ट कर मार गिराया। अधिकारियों के अनुसार, हवा में नष्ट की गई मिसाइलों का मलबा रिहायशी इलाकों में गिरने से चार नागरिक घायल हो गए।
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तनाव तब और गहरा गया जब सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत के प्रमुख शहर दहरान में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) की एक प्रशासनिक इमारत को निशाना बनाया गया। हमले के बाद इमारत के एक हिस्से में मामूली आग लग गई, जिसे आपातकालीन दस्तों ने तुरंत बुझा लिया। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। हालांकि, अरामको और अन्य रणनीतिक ऊर्जा प्रतिष्ठानों के पास हुए इन हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति, क्षेत्रीय सुरक्षा और लाल सागर के जहाजरानी मार्ग की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं खड़ी कर दी हैं।



