यूपी में सनातन धर्म का संकट: अविमुक्तेश्वरानंद की धमकी, क्या सपा ने किया राजनीति का खेल

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और यूपी सरकार के मध्य जुबानी जंग तेज हो गई है। वार-पलटवार का सिलसिला थम नहीं रहा है। बात औरंगजेब से बढ़कर कालनेमि तक पहुंच चुकी है। यह विवाद कहां जाकर रुकेगा, कोई नहीं जानता। अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती आजकल सुर्खियों में हैं। प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर वह शाही सवारी के साथ स्नान करने निकले थे।

मेला प्रशासन ने उनके काफिले को बीच में रोक दिया था। उन्हें बाकी अखाड़ों की भांति स्नान करने की सलाह दी गई थी। ऐसे में विवाद बढ़ गया था। पुलिस के साथ अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों की मारपीट तक हो गई थी। इसके बाद से उन्होंने मेला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्हें समाजवादी पार्टी (सपा) का समर्थन मिलने से यह मामला राजनीतिक रंग भी ले चुका है। नाराज अविमुक्तेश्वरानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पर जुबानी हमला बोल दिया।

क्या सच में वो औरंगजेब से बुरे हैं

उन्होंने सनातन के लिए यूपी सीएम को औरंगजेब से बुरा बताकर आलोचना की थी। इस पर विवाद और गहरा गया है। यूपी सीएम ने अब बगैर नाम लिए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर निशाना साधा है। हरियाणा के सोनीपत में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि धर्म सिर्फ वेश या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में दिखाई देना चाहिए। चूंकि कई ‘कालनेमि’ धर्म की आड़ में सनातन को कमजोर कर रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने बेशक अविमुक्तेश्वरानंद का नाम नहीं लिया, मगर उनके इशारे को समझा जा सकता है। जिस कालनेमि का जिक्र सीएम योगी ने अपने भाषण में किया उसके बारे में रामायण में उल्लेख मिलता है। कालनेमि मायावी राक्षस था, जिसने संजीवनी बूटी लाने गए राम भक्त हनुमान को संत बनकर भरमाने की कोशिश की थी। बाद में हनुमान जी ने उसके छल को पहचान लिया और फिर उसे मार डाला। इसके पहले सपा ने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से बदसलूकी की घटना को सनातन का अपमान बताया था।

मौनी अमावस्या से जारी इस विवाद का पटाक्षेप नहीं हो पाया है। सियासत गर्माने से यह विवाद और गहराने की संभावना जाहिर की जा रही है। उधर, तमिलनाडु के खेल मंत्री उदयनिधि स्टालिन के ‘सनातन धर्म के उन्मूलन’ के आह्वान संबंधी बयान ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। एक कार्यक्रम में स्टालिन ने कहा था कि कुछ चीजों का विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें जड़ से खत्म करना होगा। जिस प्रकार डेंगू, मच्छर, मलेरिया या कोरोना वायरस को जड़ से खत्म करना जरूरी है, उसी प्रकार हमें सनातन धर्म को जड़ से खत्म करना होगा।

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मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच की इस मामले में टिप्पणी ध्यान देने योग्य है। कोर्ट ने माना कि सनातन धर्म को मिटाने का आह्वान नरसंहार के समान निहितार्थ रखता है। न्यायालय ने ये टिप्पणी भाजपा अमित मालवीय के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर की। दरअसल स्टालिन ने सवा दो साल पहले उक्त विवादित बयान दिया था।

अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उदयनिधि स्टालिन दोनों से जुड़े मामलों पर सियासत में खूब चर्चा हो रही है। देश में धर्मगुरुओं से जुड़े विवाद अक्सर तूल पकड़ लेते हैं। स्वामी रामभद्राचार्य महाराज और बाबा बागेश्वर आदि के बयानों पर कई बार सियासी तनातनी देखने को मिल चुकी है। वहीं, अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वह समर्थकों संग धरना दे रहे हैं। नतीजन मामला और उलझ चुका है। वैसे इस प्रकार के विवाद उचित नहीं माने जा सकते हैं।

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