कविनगर रामलीला में धूमधाम से हुआ रावण दहन, बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
विजयदशमी पर रावण के पुतले का दहन देखने उमड़ा जनसैलाब, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा रामलीला मैदान

गाजियाबाद। विजयदशमी के पावन अवसर पर गाजियाबाद के कविनगर रामलीला मैदान में रावण दहन का आयोजन श्रद्धा, उत्साह और धूमधाम के साथ किया गया। रावण के विशाल पुतले में आग लगते ही पूरा रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। आसमान में उठती आग की लपटों और धुएं के बीच रावण का पुतला धू-धू कर जलने लगा। इस दृश्य को देखने के लिए मैदान में मौजूद लोगों में खासा उत्साह दिखाई दिया।
विजयदशमी का पर्व भारतीय संस्कृति और परंपरा में विशेष महत्व रखता है। यह पर्व भगवान श्रीराम द्वारा रावण पर विजय प्राप्त करने की याद दिलाता है और समाज को संदेश देता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य, धर्म और न्याय की ही होती है। कविनगर रामलीला में आयोजित रावण दहन के दौरान भी यही संदेश देखने को मिला।
रामलीला मैदान में रावण दहन का दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। जैसे ही पुतले में आग लगी, लोगों ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ विजयदशमी का उत्सव मनाया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पर्व को लेकर उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने इस आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और परंपराओं से जुड़कर त्योहार की खुशियां साझा कीं।
रावण दहन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन में व्याप्त अहंकार, अन्याय, क्रोध और बुराइयों को समाप्त करने का प्रतीक भी है। रावण विद्वान और शक्तिशाली होने के बावजूद अपने अहंकार और गलत निर्णयों के कारण पराजित हुआ। भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कविनगर रामलीला में रावण दहन के अवसर पर लोगों ने विजयदशमी की खुशियां मनाते हुए समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश दिया। यह आयोजन लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी बना।
विजयदशमी का संदेश यही है कि हमें अपने भीतर की बुराइयों को समाप्त कर सत्य, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। रावण दहन के साथ ही लोगों ने बुराई पर अच्छाई की विजय के इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाया।



