यहां बैंगनी कलर पहनने पर मिलती थी मौत की सजा

Purple color ban: आजकल बैंगनी रंग का कपड़ा पहनना एक सामान्य बात बन चुकी है लेकिन इतिहास में इस रंग को पहनने का मतलब था जान की बाजी लगाना। यह रंग सिर्फ एक फैशन नहीं था बल्कि प्राचीन सभ्यताओं में सत्ता ऐश्वर्य और विशेषाधिकार का प्रतीक भी था।

बैंगनी रंग की कीमत, सोने से भी ज्यादा

पुरान दौर में बैंगनी रंग इतना महंगा था कि इसकी कीमत सोने से भी अधिक मानी जाती थी। इसके दुर्लभता की वजह आश्चर्यजनक थी। उस समय रंग बनाने के लिए रासायनिक उत्पादों का उपयोग नहीं किया जाता था। बैंगनी रंग जिसे “टायरियाई बैंगनी” कहा जाता था भूमध्य सागर में मिलने वाले म्यूरेक्स (Murex) नामक समुद्री घोंघे से प्राप्त होता था। रंग बनाने की प्रक्रिया इतनी कठिन थी कि एक ग्राम रंग प्राप्त करने के लिए करीब 9000 घोंघों को मारना पड़ता था। इस कठिन और महंगे उत्पादन की वजह से बैंगनी रंग इतना कीमती था कि यह सोने से भी अधिक मूल्यवान हो जाता था।

यहां मिलता था मृत्युदंड

रोमन साम्राज्य में बैंगनी रंग केवल सम्राट और उनके परिवार के सदस्य पहन सकते थे। किसी सामान्य नागरिक द्वारा बैंगनी पहनना न केवल अवैध था बल्कि यह राजद्रोह माना जाता था। इसके लिए मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती थी।

इसके बाद इंग्लैंड में महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ‘संपट्यूरी कानून’ (Sumptuary Laws) लागू किए। इन कानूनों के तहत लोगों को अपनी सामाजिक स्थिति के अनुसार कपड़े पहनने की अनुमति थी। बैंगनी रंग केवल शाही परिवार के लिए ही सुरक्षित रखा गया था। अगर किसी व्यक्ति ने इन नियमों का उल्लंघन किया तो उसे भारी जुर्माना जेल या संपत्ति की जब्ती का सामना करना पड़ता था।

फिर ऐसे हुई बैंगनी कलर की खोज (How was the color purple discovered?)

यह शाही एकाधिकार लंबे समय तक चला लेकिन 1856 में एक वैज्ञानिक प्रयोग ने इस इतिहास को बदल दिया।

एक युवा रसायनज्ञ विलियम हेनरी पर्किन मलेरिया की दवा बनाने के प्रयास में थे। उनके प्रयोग के दौरान एक गहरे बैंगनी रंग का पदार्थ उत्पन्न हुआ। यह एक साधारण गलती थी लेकिन पर्किन ने उस रंग का विश्लेषण किया और दुनिया की पहली ‘सिंथेटिक डाई’ (कृत्रिम रंग) की खोज कर डाली।

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बैंगनी रंग अब सबके लिए

पर्किन का यह आविष्कार ने बैंगनी रंग को आम जनता के लिए भी सुलभ बना दिया। अब इसे समुद्री घोंघों से प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं थी और यह सस्ती कीमत पर फैक्ट्रियों में तैयार होने लगा। परिणामस्वरूप बैंगनी रंग अब केवल शाही परिवारों तक सीमित नहीं रहा। आम जनता भी इस रंग को पहनने लगी और समाज में एक नए फैशन का जन्म हुआ। धीरे-धीरे शाही प्रतिबंध अप्रचलित हो गए और ये कलर सभी के लिए उपलब्ध हो गया।

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