एक भागकर भारत आई, दूसरी ने दिया भड़काऊ बयान! हसीना और महबूबा के बुरे दिन क्यों
चर्चाओं में हसीना महबूबा

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती एकाएक सुर्खियों में है। शेख हसीना को जहां बांग्लादेश की अदालत ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है, वहीं महबूबा मुफ्ती ने दिल्ली ब्लास्ट पर आपत्तिजनक बयान देकर बेवजह का विवाद पैदा कर दिया है। सियासी जगत में हसीना और महबूबा ने अपनी अलग पहचान कायम की है। ये दोनों नामचीन हस्तियां काफी समय से बुरे दौर से गुजर रही हैं। दोनों का राजनीतिक करियर संकट में घिरा है।
पड़ोसी बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे पर भड़की हिंसा की आग ने शेख हसीना को देश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया था। इसके बाद से वह भारत में रहने को मजबूर हैं। बांग्लादेश में हिंसक आंदोलन में चौदह सौ प्रदर्शनकारियों की जान चली गई थी। इसके लिए वहां की अदालत ने उन्हें दोषी ठहरा कर फांसी की सजा सुनाई है। जबकि जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव में महबूबा मुफ्ती की पार्टी को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। चुनावी हार से महबूबा के सियासी कद को नुकसान पहुंचाया है। फिलहाल वह सक्रिय राजनीति से दूर दिखाई पड़ रही हैं। इस बीच दिल्ली ब्लास्ट पर विवादित बयानबाजी कर वह चर्चाओं में आ गई हैं।
उन्होंने बयान दिया कि कश्मीर का मसला दिल्ली में लाल किले के सामने गूंज रहा है। जो युवा कभी पत्थर और बंदूकें उठाते थे, वह अब आत्मघाती हमलावर बन रहे हैं। महबूबा मुफ्ती के इस बयान की देशभर में आलोचना हो रही है। भाजपा ने उनके बयान को राष्ट्रविरोधी करार दिया है। हरियाणा सरकार में ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने महबूबा को उग्रवादियों की मां बता दिया है। भाजपा प्रवक्ता अनिल कोहली ने पीडीपी प्रमुख महबूबा से सवाल पूछा है कि आप आतंकवाद के खिलाफ हैं या नहीं? जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी पीडीपी प्रमुख की आलोचना की है।
मगरमच्छ के आंसू से महबूबा की तुलना
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने महबूबा के बयान की मगरमच्छ के आंसू से तुलना की है। महबूबा मुफ्ती से संवेदनशील मसलों पर समझदारी भरा बयान देने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। चूंकि वह पहले भी भड़काऊ बयानबाजी करती रही हैं। उनका ताजा बयान आतंकियों का बचाव करता नजर आता है। जम्मू-कश्मीर के युवाओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।
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वैसे शेख हसीना और महबूबा मुफ्ती की सोच तथा राजनीति करने के तरीके में जमीन आसमान का अंतर रहा है। हसीना ने प्रधानमंत्री रहते समय बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों की कभी दाल गलने नहीं दी। वह देश के विकास व अर्थव्यवस्था को ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश में हमेशा प्रयत्नशील रहीं। उन्हें सत्ता से बेदखल कराने के पीछे अमेरिका, चीन और पाकिस्तान की साजिश से इनकार नहीं किया जाता है। बांग्लादेश की अदालत ने जिस मनमाने तरीके से हसीना को सजा सुनाई है, उसे लेकर विवाद उभर आया है।
चूंकि कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाने से पहले हसीना को अपना पक्ष रखने का मौका तक नहीं दिया है। बांग्लादेश में वर्तमान में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार चल रही है। अंतरिम सरकार चाहती है कि भारत जल्द से जल्द शेख हसीना को बांग्लादेश के हवाले कर दे। हालांकि यह संभव नहीं है। मृत्युदंड के फैसले से डरने की बजाए हसीना ने विरोधियों से लड़ने का ऐलान कर दिया है। उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। वहीं, महबूबा मुफ्ती की मुसीबत भी बढ़ने के आसार हैं। विवादित बयान की वजह से वह नई मुश्किल में घिर सकती हैं।



