“अशोक विजयदशमी से दशहरा तक” विषय पर राष्ट्रीय विचार मंथन आयोजित
अम्बेडकरी महिला मंच की ऑनलाइन संगोष्ठी में महिला मुक्ति, सामाजिक समानता और धम्म परिवर्तन पर हुई चर्चा

नई दिल्ली। धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस के उपलक्ष्य में अम्बेडकरी महिला मंच ने 20 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार को ‘अशोक विजयदशमी से दशहरा तक’ विषय पर राष्ट्रीय विचार मंथन (ऑनलाइन संगोष्ठी) का आयोजन किया। ‘अम्बेडकरनामा’ यूट्यूब चैनल पर प्रसारित इस कार्यक्रम में देशभर के प्रतिभागियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के धम्म परिवर्तन, जातिगत भेदभाव, महिला मुक्ति और अम्बेडकरी आंदोलन की चुनौतियों पर विचार रखे।
मंच की महासचिव शालिनी ने संचालिका संगीता रावत का परिचय देते हुए बताया कि वे शिक्षिका होने के साथ मंच की कार्यकारिणी सदस्य हैं। वे ‘माता सावित्रीबाई फुले उन्नयन महिला समिति’ के माध्यम से 400 से अधिक महिलाओं को जागरूक कर चुकी हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजरानी ने छुआछूत और जातिगत असमानता की ऐतिहासिक स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नागपुर में 14 अक्टूबर 1956 को डॉ. आंबेडकर द्वारा लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धम्म स्वीकार करना सामाजिक स्वाभिमान और समानता की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।
विशिष्ट वक्ता भंवर मेघवंशी ने कहा कि अशोक विजयदशमी पर धम्म परिवर्तन केवल धार्मिक बदलाव नहीं, बल्कि मुक्ति, तर्क, नैतिकता और मानवीय समानता की उद्घोषणा थी। उन्होंने अम्बेडकरी आंदोलन में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी बढ़ाने, पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने और असहमति के लिए स्थान बनाने पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता रतन लाल ने महिलाओं से डॉ. आंबेडकर के भाषणों और लेखन का अध्ययन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए महिलाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बच्चों में उच्च आकांक्षाएं विकसित करना जरूरी है। उन्होंने आंबेडकर के महिला मुक्ति संबंधी विचारों का आलोचनात्मक अध्ययन करने की आवश्यकता भी बताई।
अंत में नीलम रावत ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि समाज की वास्तविक विजय किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि अज्ञानता, भेदभाव और असमानता पर हासिल होनी चाहिए।



