Mission Sudarshan Chakra: भारत के पास होगा अपना Iron Dome, जानें कैसे बदलेगी जंग की तस्वीर

Mission Sudarshan Chakra: भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार जारी है खासकर रक्षा क्षेत्र में। ऐसे में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या दिल्ली आयरन डोम प्रणाली खरीदेगी। इज़राइल की दो दिवसीय यात्रा पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में महत्वाकांक्षी “मिशन सुदर्शन चक्र” की घोषणा की थी जो एक बहुस्तरीय और परस्पर जुड़ी वायु रक्षा प्रणाली होगी।
कई रिपोर्टों में यह सुझाव दिया गया है कि इज़राइल अपने वायु रक्षा प्रणालियों जैसे कि आयरन डोम और आयरन बीम भारत को सौंप सकता है। आयरन डोम इज़राइल की प्राथमिक वायु रक्षा प्रणाली है वहीं आयरन बीम का उपयोग ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है।
‘मिशन सुदर्शन चक्र’ क्या है? (what is Mission Sudarshan Chakra)
पिछले साल स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ की घोषणा की थी। प्रधानमंत्री के अनुसार यह परियोजना 2035 तक पूरी हो जाएगी और देश के सभी प्रमुख बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करेगी। इसी कारण इसका नाम भगवान कृष्ण के दिव्य चक्र ‘सुदर्शन चक्र’ से लिया गया है।
इसमें तीन परतें कौन-कौन सी होंगी?
कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में इजरायली तकनीकें ड्रोन छोटे रॉकेट और मोर्टार गोले के हमलों से बचाव में मददगार साबित होंगी। यह आयरन डोम जैसी तकनीक हो सकती है जिसमें अत्याधुनिक रडार सेंसर और एआई-आधारित ट्रैकिंग सिस्टम शामिल होंगे। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों विशेष रूप से वहां के सैन्य बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
मध्य स्तर पर क्रूज मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसमें साइबर सुरक्षा और वास्तविक समय डेटा साझाकरण प्रणालियों से लैस बराक-8 एमआर-एसएएम और एलआर-एसएएम के उन्नत संस्करण शामिल होंगे।
तीसरे स्तर पर परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसमें एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसी तकनीकें शामिल होंगी जिनका उद्देश्य अंतरिक्ष या वायुमंडल की ऊपरी परतों में मिसाइलों को नष्ट करना है। यह देश की रणनीतिक संपत्तियों की सुरक्षा में अंतिम और सबसे मजबूत रक्षा पंक्ति होगी।
आयरन डोम भारत के रक्षा क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा कैसे दे सकता है?
आयरन डोम पाकिस्तान के ड्रोन हमलों और चीन की झुंड ड्रोन रणनीति का मुकाबला करने में भारत की मदद करेगा।
- इजराइल द्वारा विकसित आयरन डोम प्रणाली की सफलता दर 90 प्रतिशत तक है।
- यह रॉकेट मोर्टार कम दूरी की मिसाइलों और ड्रोन के खिलाफ प्रभावी है।
- यह उन मिसाइलों और प्रक्षेपास्त्रों से भी बचता है जो खाली क्षेत्रों में गिर सकते हैं।
- यह वास्तविक समय के खतरों का विश्लेषण करने में भी मदद कर सकता है।
- एक लॉन्चर में लगभग 20 तामिर इंटरसेप्टर मिसाइलें हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? (PM Modi Israel visit 2026)
प्रधानमंत्री मोदी की मध्य पूर्व के इस देश की यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और इज़राइल हेरॉन एमके-2 ड्रोन और बराक-8 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद सहित कई अहम रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल मई में चार दिवसीय ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ये प्रणालियां बेहद सफल रही थीं।



