हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी में कौन-कौन से देश हैं सबसे आगे
which country have hypersonic missile: जानिए कौन-कौन से देश हैं हाइपरसोनिक मिसाइल टेक्नोलॉजी की रेस में – रूस, अमेरिका, चीन और भारत कैसे बना रहे हैं आधुनिक युद्ध प्रणाली में बढ़त।

which country have hypersonic missile: आज के दौर में जहां तकनीक हर सेक्टर में क्रांति ला रही है, वहां रक्षा क्षेत्र सबसे तेज़ बदलावों का गवाह बन रहा है। अब बात केवल युद्ध की तैयारी की नहीं बल्कि तकनीकी प्रभुत्व की हो चुकी है। इस लड़ाई में सबसे घातक हथियार बनकर उभरी हैं हाइपरसोनिक मिसाइलें। अमेरिका, रूस, चीन और भारत इस टेक्नोलॉजी की रेस में न केवल शामिल हैं बल्कि पूरी ताकत से आगे बढ़ रहे हैं।
हाइपरसोनिक मिसाइल आखिर होती क्या है?
साधारण मिसाइलों की तुलना में हाइपरसोनिक मिसाइलें Mach 5 या उससे भी अधिक गति से उड़ान भर सकती हैं। यानी ये मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना तेज होती हैं। सिर्फ स्पीड ही नहीं इनकी मैन्युवरिंग क्षमता भी ऐसी होती है कि इन्हें ट्रैक करना मुश्किल और इंटरसेप्ट करना लगभग नामुमकिन हो जाता है। यही वजह है कि ये आधुनिक युद्ध प्रणाली में गेमचेंजर मानी जा रही हैं।
कौन है इस रेस में सबसे आगे?
रूस
रूस ने Avangard और Kinzhal जैसे घातक सिस्टम पहले ही अपनी आर्मी में शामिल कर लिए हैं। उसकी यह दलील है कि ये मिसाइलें किसी भी मौजूदा डिफेंस शील्ड को बेकार कर सकती हैं। रूस इस क्षेत्र में शुरुआती बढ़त बना चुका है और खुद को इस रेस में अमेरिका से आगे बताता है।
अमेरिका
ट्रंप का देश भले ही थोड़ी देर से इस ट्रैक पर आया हो, मगर अब उसकी रफ्तार तेज है। ARRW (Air-Launched Rapid Response Weapon) और Hypersonic Glide Vehicle (HGV) जैसे प्रोजेक्ट्स पर बड़े स्तर पर काम हो रहा है। पेंटागन की योजना है कि 2027 तक इनका सैन्यीकरण कर दिया जाए।
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चीन
ड्रैगन ने DF-17 हाइपरसोनिक मिसाइल के कई सफल ट्रायल कर लिए हैं। इसकी तैनाती भी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा वह समुद्री और अंतरिक्ष बेस्ड हाइपरसोनिक तकनीकों पर भी तेजी से काम कर रहा है। चीन का मकसद है अमेरिका और रूस को सैन्य शक्ति में कड़ी चुनौती देना।
भारत
हिंदुस्तान ने भी हाल ही में इस क्षेत्र में बड़े कदम बढ़ाए हैं। DRDO द्वारा बनाई जा रही ब्रह्मोस-II मिसाइल और HSTDV (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle) की सफल उड़ान ने भारत को इस एक्सक्लूसिव क्लब में शामिल कर दिया है। भारत फिलहाल टेक्नोलॉजी डेमोन्स्ट्रेशन फेज में है, मगर रफ्तार अच्छी है।



