अचानक कहां गायब हो गए थे पानी पिलाने वाले जुनैद, यूट्यूब इंटरव्यू में खोले पुलिस हिरासत के सारे अंदरूनी राज़

Junaid Jantar Mantar: दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान लोगों को पानी और खाना उपलब्ध कराकर चर्चा में आए जुनैद ने अपनी कथित गुमशुदगी को लेकर कई खुलासे किए हैं।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर हुए जश्न में उनके नजर नहीं आने पर सोशल मीडिया पर उनके गायब होने की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। अब एक यूट्यूब इंटरव्यू में जुनैद ने बताया कि उन्हें दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था और आंखों पर पट्टी बांधकर उत्तराखंड के मसूरी ले जाकर छोड़ दिया गया था।
कहां गायब थे जुनैद
जुनैद ने दावा किया कि 24 जुलाई की रात उन्हें एक कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद वह रेबीज का टीका लगवाने राम मनोहर लोहिया अस्पताल गए थे। रात करीब 12 बजे अस्पताल से निकलने के बाद जब वह ऑटो का इंतजार कर रहे थे, तभी एक सफेद स्कॉर्पियो उनके पास आकर रुकी। उसमें से कुछ लोग उतरे और उन्हें पकड़ लिया। उन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का कर्मचारी बताया और पहचान पत्र भी दिखाया, लेकिन उनके चेहरे ढके हुए थे। इसके बाद जुनैद को गाड़ी में बैठाकर आंखों पर पट्टी बांध दी गई और एक अज्ञात जगह पर ले जाया गया, जहां उन्हें पूरी रात रखा गया।
उनके अनुसार, अगले दिन कुछ अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर उन्हें छोड़ने की बात कही गई। इसके बाद उन्हें फिर गाड़ी में बैठाया गया और कई घंटे सफर कराने के बाद मसूरी में छोड़ दिया गया। जब उन्होंने आंखों से पट्टी हटाई तो उन्हें चारों ओर पहाड़ दिखाई दिए। हालांकि जुनैद ने कहा कि इस दौरान उनके साथ मारपीट नहीं की गई और पुलिसकर्मियों ने उनके साथ ठीक व्यवहार किया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता और ससुराल के कुछ लोगों को भी पूछताछ के लिए ले जाया गया था।
क्या करते हैं जुनैद
जुनैद ने बताया कि वह पेशे से वकील हैं और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। 20 जून को आंदोलन शुरू होने के दिन वह परीक्षा देने गए थे और बाद में जंतर-मंतर पहुंचे। वहां उन्होंने गर्मी में लोगों को पानी के लिए परेशान देखा, जिसके बाद उन्होंने खुद पानी और भोजन की व्यवस्था शुरू कर दी। धीरे-धीरे अन्य लोग भी इस सेवा से जुड़ गए और खाने-पीने की व्यवस्था सामूहिक प्रयास से चलने लगी।
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फंडिंग के आरोपों पर जुनैद ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी से नकद या ऑनलाइन पैसा नहीं लिया। लोग जरूरत के अनुसार पानी, बिस्किट, दवाइयां या घर का बना खाना लाकर सहयोग करते थे। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन खत्म होने के बाद उनकी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके या अन्य नेताओं से बातचीत नहीं हो पाई है, हालांकि पार्टी की लीगल टीम की ओर से उन्हें कानूनी मदद का भरोसा मिला है।



