India EU Deal: सभी पर नहीं सिर्फ इन कारों पर मिलेगी टैक्स में छूट
India EU Deal: भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के तहत ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर एक ज़रूरी जानकारी सामने आई है। घरेलू कार बनाने वाली कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने ‘मास मार्केट’ कारों, यानी आम जनता द्वारा खरीदी जाने वाली कारों को इस एग्रीमेंट से बाहर कर दिया है। बुधवार को जारी एक ऑफिशियल बयान में साफ किया गया कि इंपोर्ट ड्यूटी में कोई भी छूट सिर्फ़ 25 लाख रुपये (15,000 यूरो) से ज़्यादा कीमत वाली पैसेंजर कारों को ही मिलेगी। भारत के कुल कार मार्केट का लगभग 90% हिस्सा 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों का है, जो इस एग्रीमेंट के तहत पूरी तरह सुरक्षित हैं।
महंगी कारों पर टैक्स कम होगा
सरकार ने इंपोर्ट ड्यूटी में छूट को तीन अलग-अलग प्राइस कैटेगरी में बांटा है। 15,000 रुपये (लगभग 13.5 लाख रुपये CIF वैल्यू) से कम कीमत वाली कारों पर कोई छूट नहीं दी जाएगी। 15,000 से 35,000 यूरो के बीच की कारों पर पहले साल 35% इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी। वहीं, 35,000 से 50,000 यूरो और उससे ज़्यादा की महंगी कारों पर पहले साल 30% ड्यूटी कम होगी। इन कैटेगरी के लिए हर साल करीब 33,000 से 34,000 गाड़ियों का कोटा तय किया गया है।
इंपोर्ट कोटा लिमिट और लिमिटेड असर
इस एग्रीमेंट के तहत भारत ने यूरोपियन कंपनियों को एक तय कोटा दिया है। यह रियायती इंपोर्ट ड्यूटी हर साल कुल 2.5 लाख कारों तक ही लागू होगी। इसमें से 1.6 लाख कारें डीज़ल और पेट्रोल (ICE) इंजन वाली होंगी, वहीं 90,000 कारें इलेक्ट्रिक (EV) कैटेगरी में होंगी। भारत के कुल कार मार्केट, जो हर साल 4.3 मिलियन से ज़्यादा कारें बेचता है, की तुलना में यह रियायती कोटा कुल मार्केट का 2.5% से भी कम है। इससे मर्सिडीज, BMW और ऑडी जैसी कंपनियों की महंगी कारें थोड़ी सस्ती हो सकती हैं मगर छोटे और मीडियम कार मार्केट पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
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इंडियन एक्सपोर्ट को मिलेगा बड़ा मौका
ये एग्रीमेंट सिर्फ इंपोर्ट तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इंडियन कार मैन्युफैक्चरर्स के लिए भी फायदेमंद होगा। अधिकारियों के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन इंडियन कार मैन्युफैक्चरर्स को इंडिया के दिए गए कोटे से 2.5 गुना ज़्यादा कोटा देगा। इसका मतलब है कि इंडियन ऑटो कंपनियों के लिए अपनी गाड़ियों को यूरोपियन मार्केट में एक्सपोर्ट करने का रास्ता साफ हो गया है। इंडियन कारें अपनी सस्ती कीमतों और बढ़ती क्वालिटी के लिए जानी जाती हैं, इसलिए यह एग्रीमेंट इंडिया को ग्लोबल ‘एक्सपोर्ट हब’ बनने में बहुत मदद करेगा।



