गंभीर का ‘खतरनाक प्रयोग’ बना 2027 वर्ल्ड कप का मास्टरस्ट्रोक, कीवी बल्लेबाजों के उड़ गए होश

IND vs NZ highlights 2026: न्यूजीलैंड के मुश्किल दौरे के लिए जब भारतीय वनडे टीम का ऐलान हुआ था, तब क्रिकेट गलियारों में हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल के फैसले पर तीखे सवाल खड़े किए गए थे। जसप्रीत बुमराह को वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत सिर्फ टेस्ट सीरीज तक सीमित रखा गया और टी20 तथा वनडे स्क्वाड से आराम दिया गया। पूरे वनडे दल में 51 मैचों के अनुभव वाले एकमात्र सीनियर गेंदबाज मोहम्मद सिराज थे। उनके साथ अर्शदीप सिंह, गुरनूर बराड़, अंशुल कंबोज और आकिब नबी जैसे बिल्कुल नए चेहरे शामिल थे। विदेशी तेज पिचों पर ऐसे अनुभवहीन तेज गेंदबाजी आक्रमण को उतारना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं माना जा रहा था।

विवाद तब और गहरा गया जब ऑकलैंड में खेले गए पहले वनडे की प्लेइंग इलेवन में मोहम्मद सिराज का नाम भी नदारद दिखा। टीम के सबसे सीनियर पेसर के बाहर बैठने पर फैंस और आलोचकों ने चयन नीति को आड़े हाथों लिया। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि सिराज इंडिया-ए के मुकाबले में व्यस्त होने की वजह से पहले मैच के चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे। इस मुकाबले में सिर्फ 18 वनडे का अनुभव रखने वाले अर्शदीप सिंह ने पेस अटैक की अगुवाई की। इसके बाद वेलिंगटन में हुए दूसरे वनडे में सिराज की वापसी की पूरी संभावना थी, लेकिन युवा गेंदबाजों की लय को बरकरार रखने के लिए टीम मैनेजमेंट ने उसी विनिंग कॉम्बिनेशन पर भरोसा बनाए रखने का फैसला किया।

गुरनूर बराड़ ने विपक्षी बल्लेबाजी की तोड़ दी कमर

न्यूजीलैंड की उछाल भरी और मददगार पिचों पर युवा भारतीय तेज गेंदबाजों ने आलोचकों को अपने प्रदर्शन से करारा जवाब दिया। ऑकलैंड के पहले मुकाबले में भारतीय तेज गेंदबाजों ने मेजबान टीम को महज 185 रनों पर ढेर कर दिया। अर्शदीप सिंह और आकिब नबी ने नई गेंद से सटीक शुरुआत की, जिसके बाद अंशुल कंबोज और गुरनूर बराड़ ने विपक्षी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। 10 ओवर में केवल 22 रन देकर 2 अहम विकेट चटकाने वाले अंशुल कंबोज ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ बने, जबकि अर्शदीप ने 4 और गुरनूर ने 3 विकेट अपने खाते में डाले। इसके बाद वेलिंगटन में खेले गए दूसरे वनडे में गुरनूर बराड़ की तेज तर्रार और बाउंसर गेंदों का कीवी बल्लेबाजों के पास कोई जवाब नहीं था। गुरनूर ने घातक गेंदबाजी करते हुए 4 विकेट झटके और ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुने गए। अर्शदीप ने 7 ओवर में सिर्फ 16 रन देकर दबाव बनाए रखा, वहीं आकिब नबी ने भी अपना पहला अंतरराष्ट्रीय विकेट हासिल किया।

निरंतर दो एकतरफा जीत के साथ सीरीज पर पकड़ मजबूत करते ही गौतम गंभीर का वह बयान सही साबित हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर भारत यह वनडे सीरीज जीतता है तो इसका पूरा श्रेय गेंदबाजों को मिलना चाहिए। इस प्रयोग के पीछे गंभीर और गिल की सोच साफ थी—जसप्रीत बुमराह जैसे दिग्गज की मौजूदगी में अक्सर टीम और कप्तान विकेट के लिए उन्हीं पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में युवाओं को सीधे जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की रणनीति अपनाई गई। यह दांव जोखिम भरा था, लेकिन नतीजों ने इसे मास्टरस्ट्रोक साबित कर दिया।

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इस दौरे ने 2027 वनडे वर्ल्ड कप के लिए भारत के तेज गेंदबाजी आक्रमण की मजबूत नींव रख दी है। साउथ अफ्रीका की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बुमराह के साथ मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और बाएं हाथ के विकल्प के रूप में अर्शदीप सिंह मुख्य पेस बैटरी का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं आकिब नबी और अंशुल कंबोज मजबूत बैकअप के रूप में उभर चुके हैं। चोट से उबर रहे हार्दिक पांड्या और हर्षित राणा की वापसी के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी का पूल और अधिक आक्रामक और संतुलित नजर आएगा।

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