अयोध्या की पिच पर फिर भाजपा को मात देने की तैयारी, अखिलेश ने खोला 2027 का सबसे खतरनाक फॉर्मूला

Ayodhya Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है और इसका मुख्य अखाड़ा एक बार फिर रामनगरी अयोध्या बनती दिख रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 12 दिसंबर को सपरिवार अयोध्या आने का प्रस्तावित कार्यक्रम केवल एक पारिवारिक या धार्मिक यात्रा भर नहीं है, बल्कि इसे भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत वैचारिक गढ़ में सपा की ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी के पूर्व मंत्री तेजनारायण उर्फ पवन पांडेय के आवास पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में अखिलेश की मौजूदगी के बाद से ही यह साफ होने लगा था कि सपा अब अयोध्या की पिच पर सीधे भाजपा के मुख्य एजेंडे को चुनौती देने की तैयारी में है।
सपा की इस रणनीति की गंभीरता को इस बात से भी समझा जा सकता है कि पार्टी ने अयोध्या विधानसभा सीट से तेजनारायण पवन की उम्मीदवारी का एलान काफी पहले ही कर दिया था। राम मंदिर इसी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आता है, जिसके चलते यह सीट राजनीतिक दृष्टिकोण से देश भर में सबसे अधिक संवेदनशील और चर्चित मानी जाती है।
सपा के अवधेश प्रसाद ने बीजेपी को दिया था झटका
भाजपा जिस अयोध्या मॉडल के दम पर केंद्र और राज्य की सत्ता के शिखर तक पहुंची, उसी अयोध्या की फैजाबाद संसदीय सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद ने भाजपा के दो बार के सांसद लल्लू सिंह को हराकर सियासी विश्लेषकों को चौंका दिया था। माना जा रहा है कि लोकसभा के इस झटके से भाजपा अभी पूरी तरह संभल भी नहीं पाई थी कि सपा ने अब विधानसभा चुनाव में भी उसी जीत के फॉर्मूले को दोहराने की तैयारी तेज कर दी है।
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राजनीतिक इतिहास देखें तो पवन पांडेय 2012 के अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में दिग्गज भाजपा नेता लल्लू सिंह को मात दे चुके हैं, हालांकि 2017 और 2022 की लहर में उन्हें भाजपा के वेदप्रकाश गुप्त के सामने हार का सामना करना पड़ा था। अब अखिलेश यादव अयोध्या सीट जीतकर न केवल लोकसभा चुनाव के नतीजों की पुष्टि करना चाहते हैं, बल्कि भाजपा के हिंदुत्व नैरेटिव की धार को उसी के केंद्र में कुंद करने की कोशिश में हैं। दीपोत्सव के मुख्य आयोजन के दिन अखिलेश के अयोध्या दौरे की खबर सामने लाकर सपा ने हेडलाइन मैनेजमेंट में मनोवैज्ञानिक बढ़त तो बना ही ली है। भौगोलिक लिहाज से अयोध्या सरयू तट पर स्थित है, जिसकी सीमाएं गोंडा और बस्ती जैसे अहम जिलों से जुड़ती हैं। ऐसे में अखिलेश के इस दौरे के दौरान आसपास के कई जिलों से जुटने वाली पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ सीधे तौर पर भाजपा के लिए एक बड़ा सियासी संदेश होगी।



