गोवा नाइट क्लब हादसा: 25 मौतें, क्या थी वो ‘खामी’ जिसने लोगों को निकलने नहीं दिया

गोवा नाइट क्लब हादसा: साल 2025 गुजरने में ज्यादा वक्त बाकी नहीं है। जाते-जाते भी यह साल किसी न किसी अनचाही घटना का गवाह बन रहा है। गोवा के नाइट क्लब में भीषण अग्निकांड की खबर ने हर किसी को व्याकुल कर दिया है। घटना में पच्चीस नागरिकों की दर्दनाक मौत और छह के घायल होने की खबर है। आग लगने का कारण सिलेंडर में विस्फोट को माना जा रहा है।
हृदयविदारक हादसे ने समूचे गोवा को झकझोर कर रख दिया है। नाइट क्लब के मालिक और मैनेजर पर एफआईआर की गई है। शुरुआती जांच में कुछ गंभीर खामियां सामने आई हैं। मसलन क्लब में प्रवेश एवं निकासी का रास्ता बेहद संकरा होना तथा आग से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजामों की कमी। देश-दुनिया में गोवा की अलग पहचान है। यह लोकप्रिय पर्यटन स्थल माना जाता है। जहां प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में देश-विदेश से सैलानी पहुंचते हैं। खुलेपन के लिए मशहूर गोवा पर पश्चिम का काफी प्रभाव है।
हमेशा गुलजार रहते हैं नाइट क्लब
समंदर किनारे मौज-मस्ती व नाइट क्लब में यादगार समय गुजारने को खासकर कपल्स उतावले रहते हैं। नववर्ष नजदीक होने की वजह से गोवा में पर्यटकों का आगमन बढ़ने लगा है। वैसे तो वहां के नाइट क्लब हमेशा गुलजार रहते हैं, मगर खास मौकों पर अप्रत्याशित भीड़ उमड़ना आम बात है। पर्यटन से गोवा को प्रतिवर्ष मोटा मुनाफा होता है। होटल, रेस्टोरेंट, बार और नाइट क्लब में खान-पान और मनोरंजन के बदले पर्यटकों को जरूरत से ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ती है। ऐसे में पर्यटन स्थल पर सैलानियों की सुरक्षा के प्रबंध भी उच्च कोटि के होने चाहिए।
गोवा के नाइट क्लब में धधकी भीषण आग ने जिस प्रकार चंद मिनटों के भीतर मौत का तांडव मचा कर रख दिया, उससे इस लोकप्रिय स्थल की छवि को धक्का लगा है। गोवा सरकार ने घटना से सबक लेकर कुछ जरूरी घोषणाएं की हैं। इसके तहत प्रत्येक क्लब का सुरक्षा ऑडिट कराने की बात भी कही गई है। हालांकि सरकार जिन बिंदुओं पर कमर कसने की बात अब कर रही है, उन पर यदि पहले गौर फरमाया जाता तो संभवत: यह अग्निकांड देखने को नहीं मिलता। दरअसल देश के भीतर एक पुरानी गलत परिपाटी चली आ रही है। कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही सिस्टम की नींद टूटती है।
आखिर हादसा होने का इंतजार क्यों किया जाता है
सवाल यह कि आखिर हादसा होने का इंतजार क्यों किया जाता है? क्यों पहले से उन कमियों को दूर करने की कोशिश नहीं होती, जो बड़े हादसे को जन्म देती हैं। खैर, देर आए, दुरूस्त आए। कम से कम बाकी नाइट क्लबों की असलियत तो सामने आ सकेगी। नाइट क्लब के नाम पर मुनाफे का कारोबार कर रहे कारोबारियों को अपनी गलती सुधारने का मौका मिलेगा।
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वैसे क्रिसमस और नववर्ष के अवसर पर सिर्फ गोवा ही नहीं बल्कि देशभर में जश्न का माहौल होता है। अलबत्ता गोवा की घटना को ध्यान में रखकर केंद्र एवं राज्य सरकारों को सभी जगह पर होटल, रेस्टोरेंट, फार्म हाउस, बार एवं नाइट क्लब में सुरक्षा ऑडिट पर ध्यान देने की जरूरत है ताकि गोवा जैसी घटना की पुनरावृत्ति कहीं और न हो पाए। नाइट क्लब के मालिक व मैनेजर पर कानूनी कार्रवाई करने के अलावा उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की जाए, जिन पर इस प्रकार की घटना को रोकने का दायित्व था।



