जिलाधिकारी की अनोखी पहल: अब गांवों में ही लगेगी चौपाल, गांव स्तर पर होगा समस्याओं का समाधान

मऊ। जनपद मऊ में जिलाधिकारी की विशेष पहल पर अब लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए शहर या तहसील मुख्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। जिलाधिकारी ने निर्णय लिया है कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों में चौपाल लगाई जाएगी, जिसमें गांव स्तर पर ही लोगों की समस्याओं का निस्तारण किया जाएगा। इस नई पहल से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी ने जनपद के सभी उप जिलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों तथा सरकारी योजनाओं के संचालन में अग्रणी विभागों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नवंबर के प्रथम सप्ताह में चौपालों का रोस्टर तैयार कर लिया जाए, ताकि योजनाबद्ध ढंग से सभी गांवों में चौपाल आयोजित की जा सके।
इन चौपालों में राजस्व, ग्राम विकास, स्वास्थ्य, श्रम, पूर्ति, सामाजिक कल्याण, महिला कल्याण सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहेंगे। चौपाल के माध्यम से न केवल जन समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाएगा, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का स्थलीय सत्यापन भी किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि चौपालों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पात्र लाभार्थी को योजनाओं से वंचित न रहना पड़े।
उन्होंने बताया कि चौपालों के दौरान आयुष्मान भारत कार्ड, अंत्योदय कार्ड, राशन कार्ड, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन, जमीनी विवाद, बिजली, पानी, सड़क जैसी जनहित की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया जाएगा। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि चौपाल के आयोजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और हर ग्राम पंचायत तक इसकी सूचना सुनिश्चित रूप से पहुंचाई जाए।
जिलाधिकारी के इस निर्णय से शासन की योजनाओं का लाभ आम जन तक अधिक पारदर्शिता और त्वरित गति से पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन अब जनता के द्वार तक पहुंचेगा, जिससे ग्रामीणों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से निजात मिलेगी।
इस पहल में जिलाधिकारी के साथ मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, मुख्य राजस्व अधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, समस्त उप जिलाधिकारी, क्षेत्राधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। चौपालों की निगरानी उच्च अधिकारियों द्वारा की जाएगी ताकि किसी भी शिकायत को अनसुना न किया जा सके।
जिलाधिकारी की इस विशेष पहल से प्रशासनिक व्यवस्था में न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि ग्रामीणों को अपने गांव में ही समस्याओं के समाधान की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे शासन और जनता के बीच भरोसे का रिश्ता और मजबूत होगा।



