जिलाधिकारी ने तीन बड़े बैनामों की जांच की, एक मामले में रिपोर्ट तलब

मऊ। जिले में बड़े मूल्य के भूमि बैनामों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने जून माह में पंजीकृत तीन उच्च मूल्य के बैनामों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मौके पर पहुंचकर जमीन की स्थिति, संबंधित अभिलेखों और स्टांप शुल्क का मिलान कराया। जांच के दौरान दो मामलों में सभी दस्तावेज सही पाए गए, जबकि एक मामले में कुछ संदिग्ध स्थिति मिलने पर विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने सबसे पहले बैनामा संख्या 5327/2026 का निरीक्षण किया। यह बैनामा श्रीमती सुमन भारद्वाज के नाम दर्ज है, जिसकी कुल मालियत 3 करोड़ 27 लाख 8 हजार रुपये है। यह संपत्ति सदर तहसील के मौजा ताहीरपुर में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 1308.25 वर्ग मीटर है। मौके पर अभिलेखों, भूमि की स्थिति और स्टांप शुल्क का मिलान किया गया। जांच में सभी दस्तावेज सही पाए गए और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं मिली।

इसके बाद जिलाधिकारी ने बैनामा संख्या 5462/2026 की जांच की। यह बैनामा श्रीमती अंजू के नाम पर पंजीकृत है, जिसकी मालियत 1 करोड़ 19 लाख 16 हजार रुपये है। यह जमीन सदर तहसील के मौजा हकीकतपुर में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 375 वर्ग मीटर है। स्थलीय निरीक्षण और अभिलेखों के परीक्षण के दौरान यह प्रकरण भी पूरी तरह सही पाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में स्टांप शुल्क और अन्य दस्तावेज नियमानुसार पाए गए।

तीसरे प्रकरण में जिलाधिकारी ने बैनामा संख्या 5495/2026 का निरीक्षण किया। यह बैनामा जेपी फाउंडेशन (श्री शैलेंद्र मिश्रा) के नाम दर्ज है, जिसकी कुल मालियत 2 करोड़ 10 लाख रुपये है। यह संपत्ति सदर तहसील के मौजा ख्वाजाजहाँपुर में स्थित है और इसका क्षेत्रफल 1830 वर्ग मीटर है। निरीक्षण के दौरान इस मामले में अभिलेखों और स्टांप शुल्क से संबंधित कुछ बिंदु संदिग्ध पाए गए। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित तहसील अधिकारियों को पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में पंजीकृत सभी बड़े मूल्य के बैनामों की जांच पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की जाए। उन्होंने कहा कि राजस्व और स्टांप शुल्क से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा है कि भूमि खरीद-बिक्री की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे और सरकार को मिलने वाले राजस्व का कोई नुकसान न हो। इसके लिए समय-समय पर उच्च मूल्य के बैनामों का स्थलीय सत्यापन किया जाता रहेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सभी मामलों की जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

इस निरीक्षण के दौरान एआईजी स्टांप राकेश सिंह सहित राजस्व एवं स्टांप विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने भी अभिलेखों के परीक्षण में सहयोग किया और संबंधित जानकारी जिलाधिकारी को उपलब्ध कराई।

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