चाहे मैच हो या इंटरनेशनल टूर, कोहली समेत सभी क्रिकेटर खाने-पीने पर खर्च करते हैं अपना पैसा
Cricketers Facts: क्या भारतीय क्रिकेटरों को सभी खर्चों में छूट मिलती है? जानिए BCCI के डेली अलाउंस सिस्टम के बारे में और कैसे यह खिलाड़ियों को अपने खर्चों को नियंत्रित करने की आदत डालता है।
Cricketers Facts: जब भारतीय क्रिकेटर मैच खेलने जाते हैं, तो वे राजाओं की तरह होटलों में रुकते हैं। उन्हें न तो खाने की चिंता होती है और न ही बिल भरने की। क्रिकेट फैंस की आम सोच यही है। हालांकि, जब हमारी सहयोगी चैनल ने इसका रिव्यू किया, तो इन चर्चाओं के पीछे एक अलग ही सच्चाई सामने आई है।
‘डेली अलाउंस’ क्या है?
टीम इंडिया के मैनेजमेंट, पूर्व खिलाड़ियों और घरेलू क्रिकेट से जुड़े अधिकारियों के कुछ भरोसेमंद सूत्रों से बात करने के बाद यह साफ हो गया कि खिलाड़ियों को दौरे के दौरान होटल के खाने और कई निजी खर्चों का पेमेंट अपनी जेब से करना पड़ता है।
इसके लिए BCCI उन्हें एक तय TA-DA यानी ‘डेली अलाउंस’ देता है, जिससे वे अपने खाने और निजी जरूरतों का खर्च उठाते हैं। आसान शब्दों में कहें तो, BCCI होटल में रहने और खर्च का खर्च उठाता है। (जिसमें सिर्फ़ नाश्ता शामिल है) मगर, बाकी खर्च खिलाड़ियों की ज़िम्मेदारी है।
खिलाड़ियों को मिलने वाला TA-DA
₹6800 हर दिन, भारत में इंटरनेशनल मैच ₹11,500 हर दिन, विदेशी दौरे: लगभग $125 (लगभग) ₹5000 हर दिन, IPL खिलाड़ी ₹1000 से 2000 हर दिन, रणजी ट्रॉफी ₹500 से 2000 हर दिन।
खाने-पीने का अलग अकाउंट
होटल में रहने के दौरान खिलाड़ियों के लिए कोई ‘फ़्री सिस्टम’ नहीं है। हर खिलाड़ी के नाम पर खाने-पीने का अकाउंट रखा जाता है। जब खिलाड़ी चेक आउट करते हैं, तो उन्हें उनके पर्सनल खर्चों का पूरा बिल दिया जाता है। यह प्रोसेस आम मेहमानों की भीड़ में नहीं किया जाता, बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक खास काउंटर, कलेक्शन डेस्क बनाया जाता है।
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होटल पैकेज के अलावा, पर्सनल खर्च जैसे खाना, लॉन्ड्री, चाय-कॉफी, स्नैक्स, लोकल ट्रैवल (पर्सनल इस्तेमाल के लिए), फोन/इंटरनेट (नोट: होटल, एयर ट्रैवल, टीम बस और मैच फीस BCCI अलग से देता है। ये इस अलाउंस में शामिल नहीं हैं।)
पेमेंट कैसे होता है?
यह अलाउंस टूर की शुरुआत या बीच में दिया जाता है। इसे कैश, बैंक ट्रांसफर या कार्ड से जमा किया जाता है। यह अक्सर एडवांस में भी दिया जाता है।
आम फैंस को लगता है कि क्रिकेटरों के लिए सब कुछ फ्री है, मगर BCCI डिसिप्लिन्ड फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए यह तरीका अपनाता है। इससे खिलाड़ियों को अपने खर्च को लिमिट में रखने की आदत हो जाती है।


