ये कतारें जान ले लेंगी: भीषण गर्मी और गैस का संकट, याद आने लगे हैं कोरोना काल और नोटबंदी के दिन

उफ! फिर कतार में खड़े होने की टेंशन…। पढ़ाई, घरेलू कामकाज, नौकरी और तो और कोई निजी कारोबार को छोड़कर घरेलू गैस सिलेंडर का बंदोबस्त करने की जद्दोजहद में जुटा है। एक अदद सिलेंडर का इंतजाम हो जाए, इसके लिए किसी को सिफारिश लगानी पड़ रही है। सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग नहीं हो रही। न सिर्फ रिफिल बुकिंग के नियम बदल गए हैं बल्कि बुकिंग का टाइम भी बदल गया है। जिसे नए नियमों की जानकारी है, वह रिफिल बुक करने की भरसक कोशिश में लगा है। जम्मू-कश्मीर से कन्याकुमारी तक यही हाल है।
याद आने लगे हैं कोरोना काल और नोटबंदी के दिन
देशभर में रसोई गैस की किल्लत ने आमजन की परेशानी बढ़ा रखी है। कोरोना काल और नोटबंदी के कष्टदायक दिन याद आने लगे हैं। कोरोना काल में नियमों में छूट मिलने पर राशन की दुकान, शराब की दुकान, सरकारी अस्पताल, किराना की दुकान आदि पर नागरिकों कतार में खड़े होना पड़ता था। कई-कई घंटे कतार में गुजर जाते थे। इसी प्रकार नोटबंदी के दौर में बैंक शाखाओं और एटीएम बूथों के बाहर लंबी कतारें लगती थीं।
भीषण गर्मी में कतार में लगने की वजह से कई नागरिकों की जान तक चली गई थी। फिलहाल गैस एजेंसियों पर अफरा तफरी का आलम है। गैस की कालाबाजारी की आशंका बढ़ी हुई है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार ने कालाबाजारी की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, मगर उपभोक्ताओं को राहत तब मिल सकेगी जब जिम्मेदार अधिकारी फील्ड में जाकर स्थिति का जायजा लेंगे।
अधिकारियों को जमीनी हकीकत और जनता की तकलीफ से वाकिफ होना जरूरी है। ऐसे मौकों पर अफवाह फैलने में देर नहीं लगती है। अलबत्ता पुलिस-प्रशासन को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। घर-घर में गैस संकट की टेंशन हावी है। संकट के इस दौर में उन परिवारों की परेशानी को समझना आसान नहीं, जिनके पास गैस कनेक्शन तक नहीं हैं। बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं, जो मिनी सिलेंडर में ऊंचे दामों पर गैस भरवाकर अपना गुजारा करते आ रहे हैं। इन परिवारों को यदि ब्लैक में मिनी सिलेंडर भरवाना पड़ेगा तो उनका बजट जरूरत से ज्यादा गड़बड़ा जाएगा।
भारत में एलपीजी का ताजा संकट वाकई चिंताजनक
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के कारण भारत में एलपीजी का ताजा संकट वाकई चिंताजनक है। सरकार बेशक एलपीजी की किल्लत न होने का दावा कर रही है, मगर आम उपभोक्ताओं की परेशानी में निरंतर इजाफा हो रहा है। होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। व्यावयासिक सिलेंडरों की आपूर्ति को प्राथमिकता न मिलने के बाद भी घरेलू सिलेंडर आसानी से उपलब्ध न होना सवाल खड़े करता है। गैस एजेंसियों के बाहर कतार में खड़े उपभोक्ताओं के सब्र का बांध कब टूट जाए, कोई नहीं जानता।
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शासन-प्रशासन के अलावा जनप्रतिनिधियों को भी इस मुश्किल दौर में नागरिकों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। अच्छा होगा यदि जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र में एलपीजी कनेक्शन धारकों की परेशानी को समझें और उनकी हरसंभव मदद करें। गैस एजेंसी संचालकों को भी धैर्य एवं संयम से काम लेना होगा। एलपीजी की सप्लाई में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो, इसका ध्यान रखा जाना चाहिए।
लाभार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए। अन्यथा समाज में माहौल खराब होने में देर नहीं लगेगी। आपदा में अवसर तलाशने की कालाबाजारियों की हसरत कतई पूरी नहीं होनी चाहिए। यह जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की है।



