SIR ने किया वो काम जो कोई नहीं कर पाया, बॉर्डर पर जुट रहे सैंकड़ों

देश के विभिन्न राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान जोरों पर चल रहा है। इसके तहत बीएलओ डोर-टू-डोर संपर्क कर रहे हैं। मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित कर फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दरम्यान अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। दरअसल जो काम पुलिस और खुफिया इकाई नहीं कर पाती है, वह एसआईआर के खौफ से अपने आप होने लगा है।

पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों से अवैध बांग्लादेशियों ने सिर पर पांव रखकर भागना शुरू कर दिया है। एसआईआर के डर से वह स्वदेश लौटने लगे हैं। यह नजारा देखकर पुलिस, खुफिया इकाई और बीएसएफ काफी हैरान हैं। इस राज्य से सटी बांग्लादेश की सीमा के समीप प्रतिदिन बड़ी संख्या में अवैध घुसपैठिए जुट रहे हैं। वह किसी भी कीमत पर सीमा पार कर अपने मुल्क में प्रवेश पाने को उतावले हैं। हालांकि यह संभव नहीं हो पा रहा है। नतीजन सैकड़ों बांग्लादेशियों को सीमा के आसपास गुजर-बसर करनी पड़ रही है।

SIR फॉर्म भरते समय प्रत्येक नागरिक को मतदाता फोटो पहचान पत्र व आधार कार्ड दिखाना होता है। जिससे नागरिक की वास्तविक पहचान का पता चलता है। पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में अवैध तरीके से बांग्लादेशी रह रहे हैं। एजेंटों के जरिए वह बांग्लादेश से भारत में प्रवेश करते रहे हैं। खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए अवैध घुसपैठियों ने फर्जी वोटर आई कार्ड, आधार कार्ड व राशन कार्ड तक बनवा रखे हैं, मगर जिन बांग्लादेशियों के पास से दस्तावेज नहीं हैं, वह खौफ में आ चुके हैं। उन्हें डर है कि सच्चाई सामने आने पर गिरफ्तारी तय है।

बॉर्डर पर सतर्कता बढ़ी

अलबत्ता उन्होंने स्वदेशी वापसी में अपनी भलाई समझी है। पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश में एंट्री पाने के लिए वह पुन: एजेंटों के संपर्क में हैं। चूंकि भारत-बांग्लादेश के संबंध इन दिनों तनावपूर्ण चल रहे हैं, इसलिए बॉर्डर पर सतर्कता बढ़ी हुई है। देश में अवैध घुसपैठियों का मुद्दा जोर-शोर से उठ रहा है। पश्चिम बंगाल के अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, असम, केरल, पंजाब आदि राज्यों में बांग्लादेशियों के अलावा रोहिंग्या मुसलमान काफी तादाद में गैरकानूनी तरीके से रह रहे हैं।

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पश्चिम बंगाल में भाजपा अक्सर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पर अवैध घुसपैठियों को वोट बैंक की खातिर संरक्षण देने का आरोप लगाती रही है। जबकि टीएमसी का आरोप रहा है कि अवैध घुसपैठियों की आड़ में भाजपा के निशाने पर स्थानीय मुसलमान रहते हैं। फिलहाल बंगाल से घुसपैठियों का खुद भागना चर्चाओं में है।

एसआईआर को लेकर विपक्ष खुश नहीं

वैसे SIR को लेकर विपक्ष खुश नहीं है। वह केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप मढ़ रहा है। एसआईआर से विपक्ष को अपना वोट बैंक कम होने की चिंता सता रही है। विपक्ष को लगता है कि इस अभियान के जरिए उसके समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। इसके मद्देनजर विपक्ष ‘वोट चोरी’ और ‘सरकार चोरी’ जैसे आरोपों को हवा दे रहा है।

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बंगाल से अवैध बांग्लादेशियों के स्वत: पलायन के मसले पर भी सियासत गरमा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ममता बनर्जी सरकार की बेचैनी बढ़ चुकी है। चूंकि भाजपा ने अब इस राज्य पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। उधर, एसआईआर पर चुनाव आयोग की पैनी नजर है। निर्धारित अवधि में काम पूरा करने के लिए बीएलओ की भाग-दौड़ जारी है। लापरवाही बरतने पर बीएलओ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो रही है।

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