सुबह पेट नहीं होता साफ; रात को खा लें ये 2 ‘काले फल’, अगले ही मिनट खाली हो जाएगा पेट!

constipation home remedies: कब्ज की समस्या शुरुआत में बेहद सामान्य लगती है, लेकिन जब यह रोज की आदत बन जाए तो पूरा दिन बेचैनी और भारीपन में बीतता है। पेट ठीक से साफ न होने का सीधा असर हमारे काम, ऊर्जा और मूड पर पड़ता है। अक्सर लोग समझ नहीं पाते कि आखिर रोज-रोज यह परेशानी क्यों हो रही है। दरअसल, हमारे खान-पान की गलत आदतें और घंटों कुर्सी पर बैठे रहना पाचन क्रिया को धीमा कर देते हैं। हर बार चूर्ण या दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय दिनचर्या में थोड़ा बदलाव करना ज्यादा असरदार साबित होता है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट श्वेता शाह ने पुरानी कब्ज से निजात पाने के लिए 3 बेहद आसान और व्यावहारिक तरीके साझा किए हैं।
लंच के बाद 100 कदम टहलना बनाएं आदत
दोपहर का खाना खाते ही तुरंत कुर्सी पर बैठ जाना या सो जाना पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है। न्यूट्रिशनिस्ट श्वेता शाह के अनुसार, लंच करने के तुरंत बाद कम से कम 100 कदम जरूर चलना चाहिए। इसके साथ अगर हल्की और गहरी सांस लेने की ब्रीदिंग एक्सरसाइज की जाए, तो आंतों की सक्रियता बढ़ती है और खाना तेजी से पचता है, जिससे मल त्याग में आसानी होती है।
डाइट में शामिल करें प्रून्स यानी सूखे बेर
पाचन दुरुस्त रखने के लिए प्रून्स एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में डाइट्री फाइबर और प्राकृतिक सोरबिटोल पाया जाता है, जो कठोर मल को नरम कर पेट आसानी से साफ करने में मदद करता है। एक्सपर्ट की सलाह है कि सुबह 2 और रात में 2 प्रून्स खाएं। हालांकि, अगर किसी को इन्हें खाने के बाद पेट में गैस या भारीपन महसूस हो, तो वह इसकी मात्रा आधी कर सकता है।
नाभि के आसपास करें हल्की मसाज
पेट पर हल्के हाथों से गोलाकार मुद्रा में मालिश करना पेट फूलने और आंतों की रुकावट दूर करने में काफी मददगार साबित होता है। श्वेता शाह के मुताबिक, नाभि और उसके चारों तरफ हल्के दबाव के साथ की गई मालिश आंतों की मांसपेशियों को सक्रिय करती है। ध्यान रखें कि मालिश के दौरान पेट पर तेज दबाव न बनाएं। जिन लोगों की हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो या महिलाएं जो गर्भवती हैं, वे बिना डॉक्टरी सलाह के यह प्रयोग न करें।
दिनचर्या की ये बुनियादी सावधानियां भी हैं जरूरी
इन तीन उपायों के साथ-साथ पूरे दिन भरपूर पानी पीना, भोजन में हरी सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना अनिवार्य है। डाइट में फाइबर की मात्रा हमेशा धीरे-धीरे बढ़ाएं, क्योंकि अचानक बहुत अधिक फाइबर लेने से ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचें और शौच की इच्छा होने पर उसे बिल्कुल न रोकें।
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अगर कब्ज लंबे समय तक बनी रहे तो मल कठोर होने लगता है और अत्यधिक जोर लगाने से बवासीर (पाइल्स) या फिशर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है। इसलिए समय रहते अपनी दिनचर्या सुधारें और लक्षण गंभीर होने पर विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।



