Congress vs Modi: ये कैसा विश्वगुरू, रूस से तेल खरीदने के लिए भी भारत को अमेरिका की अनुमति?

Congress vs Modi: ट्रम्प का नया खेल, दिल्ली दोस्त को कहा…पुतिन से ले सकते हो तेल। कब तक चलेगा, यह अमेरिकी ब्लैकमेल…। कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर यह पोस्ट कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर अमेरिकी दबाव में काम करने का आरोप मढ़ा है। दरअसल अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद है। यह प्रमुख समुद्री मार्ग बंद रहने से ऊर्जा संकट उत्पन्न हो रहा है।

भारत में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की संभावित किल्लत ने सरकार और तेल कंपनियों से लेकर आम आदमी की बेचैनी बढ़ा दी है। देश के विभिन्न शहरों में पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। पेट्रोल-डीजल का स्टॉक बढ़ाने के लिए अफरा तफरी का आलम देखने को मिल रहा है। इसके अलावा रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना भी बढ़ रही है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के मध्य युद्ध लंबा खींचने पर दुनिया भर में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस व एलपीजी की आपूर्ति लड़खड़ा सकती है। आपूर्ति घटने पर दामों में वृद्धि होना तय है। इसका असर आम आदमी की जेब से लेकर रसोई तक पर पड़ेगा। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को सिर्फ अमेरिका, इजरायल, यूरोप और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए बंद किया है।

बेशक भारत को इस मार्ग के इस्तेमाल की छूट मिली है, मगर हालात ऐसे नहीं हैं कि कारोबार को जारी रखा जा सके। इस समुद्री रास्ते से भारत द्वारा संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत से चालीस प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल, साठ से पैंसठ प्रतिशत प्राकृतिक गैस और नब्बे प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है। मोदी सरकार पर हमलावर होने की कांग्रेस की वजह अमेरिका का वह बयान है, जिसमें कहा गया है कि भारत तीस दिन तक रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है।

इसलिए अमेरिका ने भारत पर की टैरिफ कार्रवाई

इसके पहले रूस से तेल की आपूर्ति के चलते अमेरिका ने भारत पर मनमाना टैरिफ लगा दिया था। कांग्रेस का मानना है कि सरकार को अमेरिका की अनुमति लेकर वैश्विक कारोबार करना पड़ रहा है। यह सरकार की कमजोरी को उजागर करता है। जयराम रमेश की तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी ने भी इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की है। तिवारी ने कहा कि क्या हम बनाना रिपब्लिक हैं, जो हमें अपने लिए तेल खरीदने के लिए अमेरिकी अनुमति की जरूरत है? वैसे ज्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी कुछ अधिक है।

वैसे अमेरिका की मनमानी जगजाहिर है। अमेरिका ने भारत से स्वदेश लौट रहे ईरान के जलपोत को हमला कर डुबो दिया था। इस मामले पर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जुबानी हमला बोला था। कुल मिलाकर अमेरिका-इजरायल और ईरान जहां एक-दूसरे पर मिसाइल एवं ड्रोन हमले कर रहे हैं, वहीं भारत में विपक्ष की तरफ से सरकार पर जुबानी हमले निरंतर तेज होते दिखाई दे रहे हैं।

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युद्ध पर मोदी सरकार ने अब तक तटस्थ रुख अपना रखा है। पीएम मोदी इस बात पर जोर दे चुके हैं कि युद्ध कोई विकल्प नहीं है। सैन्य ताकत के जरिए हर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। मसलन भारत का मानना है कि युद्ध की बजाए आपसी वार्ता के जरिए मुद्दों को सुलझाना चाहिए। हालांकि अमेरिका को अब तक यह समझ में आ चुका है कि वेनेजुएला की तरह ईरान कमजोर नहीं है। बता दें कि सरकार विरोधी लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर ये कैसा विश्वगुरू जो अब अमेरिका के कहने पर तय करेगा भारत को कहा से और कब तक तेल खरीदना है।

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