चाचा शिवपाल से अखिलेश तक पहुंची लोहिया ट्रस्ट की कमान, सपा की विरासत पर अब भतीजे का एकछत्र राज

Akhilesh Yadav Lohia Trust Chairman: उत्तर प्रदेश की सियासत और समाजवादी पार्टी के भीतरी सत्ता समीकरणों से जुड़ी बहुत बड़ी खबर सामने आई है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अब प्रतिष्ठित ‘लोहिया ट्रस्ट’ के नए अध्यक्ष बन गए हैं। पिछले 10 वर्षों से इस प्रभावशाली ट्रस्ट की कमान उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के मजबूत हाथों में थी, लेकिन अब अखिलेश यादव ने इसका पूर्ण नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है।

समाजवादी विचारधारा, आंदोलन और सपा से जुड़े नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच लोहिया ट्रस्ट का स्थान हमेशा से सर्वोच्च रहा है। ऐसे में इस ऐतिहासिक ट्रस्ट की बागडोर संभालना अखिलेश यादव के राजनीतिक कद और पार्टी संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है।

शिवपाल सिंह यादव वर्ष 2017 से लगातार इस ट्रस्ट के मुखिया की भूमिका निभा रहे थे, लेकिन हाल ही में आयोजित ट्रस्ट की अहम बैठक में सर्वसम्मति से अखिलेश यादव को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया गया, जिस पर खुद शिवपाल यादव समेत सभी वरिष्ठ सदस्यों ने खुशी-खुशी अपनी मुहर लगाई।

सभी 8 सदस्यों की सर्वसम्मत सहमति: जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के बाद लोहिया ट्रस्ट पर भी अखिलेश काबिज

पार्टी सूत्रों के अनुसार, लोहिया ट्रस्ट के सभी 8 सदस्यों ने इस नेतृत्व परिवर्तन पर अपनी लिखित स्वीकृति प्रदान की, जिसमें निवर्तमान अध्यक्ष शिवपाल यादव भी प्रमुख रूप से शामिल थे। इस रणनीतिक बदलाव के बाद अब अखिलेश यादव के पास समाजवादी पार्टी के संगठन के साथ-साथ पार्टी की दो सबसे बड़ी बौद्धिक और वैचारिक संपत्तियों—’लोहिया ट्रस्ट’ और ‘जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट’—की भी पूरी कमान आ गई है।

महराजगंज की पांचों सीटों पर सपा की नजर, अखिलेश यादव ने बनाया बड़ा चुनावी प्लान

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2017 में जब समाजवादी कुनबे में भीषण अंतर्कलह छिड़ी थी, तब पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल यादव को हटाकर शिवपाल यादव को लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया था। लोहिया ट्रस्ट का गठन समाजवादी पार्टी की औपचारिक स्थापना से भी पहले डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों को आगे बढ़ाने के लिए किया गया था, इसलिए सपा की वैचारिक विरासत और इतिहास में इसका स्थान बेहद खास है। ट्रस्ट का प्राथमिक उद्देश्य समाजवादी विचारधारा का व्यापक प्रचार-प्रसार करना और दल के लिए आवश्यक वैचारिक व संगठनात्मक फंड जुटाना रहा है।

Related Articles

Back to top button