महंगे सप्लीमेंट्स भूल जाएंगे, थाली में शामिल करें ये 4 चमत्कारी सब्जियां; आयुर्वेद डॉक्टर ने बताया बीमारियों का काल

Healthy Green Vegetables Ayurveda: खान-पान और सेहत को लेकर बड़े-बुजुर्गों की यह सीख हमेशा सटीक बैठती है कि अगर जीवनभर निरोगी रहना है, तो मौसमी सब्जियों से अपनी थाली भरें। भारतीय रसोई में मौजूद कई सब्जियां केवल पेट भरने का साधन नहीं हैं, बल्कि उनमें छिपे औषधीय गुण किसी असरदार दवा से कम नहीं हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक विशेष परामर्श में आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर दिव्यानी भगत ने ऐसी ही चार गुणकारी सब्जियों की सूची साझा की है। डॉक्टर के अनुसार, ये पारंपरिक सब्जियां असल में प्राकृतिक ‘सुपरफूड्स’ हैं, जिनमें सामान्य सब्जियों की तुलना में कहीं अधिक विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। इन्हें नियमित भोजन का हिस्सा बनाकर शरीर को कई गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखा जा सकता है।
हड्डियों और दिल का रक्षक: सहजन यानी मोरिंगा
डॉक्टर दिव्यानी के अनुसार, सहजन (ड्रमस्टिक या मोरिंगा) पोषण का जबरदस्त पावरहाउस है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्राकृतिक कैल्शियम, आयरन, विटामिन सी, विटामिन ए और फाइबर मौजूद रहता है। सहजन का नियमित सेवन कमजोर हड्डियों को फौलादी मजबूती देने, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को कई गुना बढ़ाने और आंखों की रोशनी को दुरुस्त रखने में बेहद असरदार साबित होता है। इसके साथ ही, यह कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को दुरुस्त कर दिल की सेहत को भी बेहतर बनाए रखता है।
डायबिटीज के लिए रामबाण: कंटोला या काकोड़ा
बारिश और मानसून के मौसम में मिलने वाली कंटोला (काकोड़ा) की सब्जी धरती की सबसे पौष्टिक और बलवर्धक सब्जियों में शुमार है। आयुर्वेद डॉक्टर का कहना है कि कंटोला ब्लड शुगर के स्तर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में काफी मददगार है, इसलिए यह मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसके नियमित सेवन से पाचन क्रिया बेहतर रहती है और मौसमी संक्रमणों से लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को भरपूर ताकत मिलती है।
कब्ज की समस्या को दूर भगाने में कारगर अरबी
स्वाद में लाजवाब अरबी पोषक तत्वों से लबरेज एक शानदार जड़ वाली सब्जी है। डॉक्टर के मुताबिक, अरबी में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जिसके चलते यह पुरानी से पुरानी कब्ज से राहत दिलाने और आंतों की कार्यप्रणाली को सुचारू रखने में अहम भूमिका निभाती है। पाचन तंत्र को दुरुस्त करने के अलावा, अरबी पोटैशियम का भी उत्कृष्ट स्रोत है, जो मांसपेशियों को एक्टिव रखकर दिनभर शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखती है।
कड़वा करेला: खून की सफाई और ग्लूकोज नियंत्रण
करेला भले ही अपनी प्राकृतिक कड़वाहट के कारण बहुत से लोगों की पहली पसंद न हो, लेकिन सेहत के लिहाज से यह बेहद अनमोल औषधि है। इसमें विटामिन सी, फोलेट, फाइबर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स का भंडार होता है। डॉ. दिव्यानी स्पष्ट करती हैं कि करेले में पाए जाने वाले खास बायोएक्टिव कंपाउंड्स खून में ग्लूकोज के स्तर को संतुलित करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। यह शरीर के रक्त को शुद्ध करने के साथ-साथ मेटाबॉलिज्म और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है।
केवल सब्जियों पर निर्भरता नहीं, संतुलित आहार है जरूरी
हालांकि ये चारों सब्जियां सेहत के लिए चमत्कारिक मानी जाती हैं, लेकिन किसी भी बीमारी में इन्हें डॉक्टर के इलाज का एकमात्र विकल्प मान लेना सही नहीं है। शरीर के सर्वांगीण विकास और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए एक संतुलित थाली (बैलेंस डाइट) का होना अनिवार्य है। इसके लिए अपनी रोजाना की खुराक में हरी सब्जियों के साथ-साथ दालें, साबुत अनाज, ताजे मौसमी फल, दूध-दही और प्रोटीन युक्त चीजें जरूर शामिल करनी चाहिए।
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पकाने की तकनीक भी तय करती है सेहत का पैमाना
सब्जियों के चयन के साथ-साथ उन्हें पकाने का तरीका भी पोषण पर गहरा असर डालता है। आमतौर पर घरों में सब्जियों को अत्यधिक तेल और भारी मसालों में डीप फ्राई कर दिया जाता है, जिससे उनके प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और उल्टा सेहत को नुकसान पहुंचता है। सब्जियों के पूरे स्वास्थ्य लाभ हासिल करने के लिए उन्हें हमेशा कम तेल, हल्के मसालों, भाप या उबले हुए तरीके से ही पकाना चाहिए।



