UP SI पेपर वायरल होते ही बवाल; ‘पंडित’ शब्द पर सियासी संग्राम शुरू, ब्रहमोफोबिया शब्द वायरल

‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’, इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए। पहला अवसरवादी, दूसरा निष्कपट, तीसरा पंडित और चौथा सदाचारी। यूपी एसआई परीक्षा में पूछे गए इस सवाल के जवाब में ‘पंडित’ शब्द का विकल्प दिए जाने पर सियासी घमासान शुरू हो चुका है। सोशल मीडिया पर प्रश्न पत्र की प्रति वायरल होने के बाद से हंगामा मच रहा है।

विवाद गहराने पर उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड को सफाई देनी पड़ी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है। इस बीच यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर ब्राह्मण समाज से कुछ व्यक्तियों को नफरत क्यों हैं? इस समाज को बार-बार नीचा दिखाने एवं अपमानित करने की कोशिश क्यों हो रही है? ब्राह्मणों पर क्यों बेवजह निशाना साधा जा रहा है? सरकार इस प्रकार के मामलों को रोकने के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं उठा रही है?

ब्राह्मणों पर क्यों बेवजह निशाना साधा जा रहा है

कुछ समय पहले हिंदी फिल्म के टाइटल ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर खासा बवाल मचा था। आलोचना का शिकार होने पर फिल्म के निर्माता-निर्देशक को बैकफुट पर आकर अपनी गलती सुधारनी पड़ी थी। इसके अलावा यूजीसी की नई गाइड लाइन पर भी बखेड़ा देखने को मिला था। इसी क्रम में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने निजी समारोह में ब्राह्मण समाज के प्रति अमर्यादित एवं अशोभनीय टिप्पणी की थी। जिस पर विभिन्न ब्राह्मण संगठनों को आवाज उठानी पड़ी थी। देश में ब्राह्मण समाज पर निशाना साधने का सिलसिला नहीं रुक रहा। यह बेहद चिंताजनक है।

ब्रहमोफोबिया शब्द वायरल

ताजा विवाद पर सीएम योगी की टिप्पणी को एक तरह से जख्म पर मरहम के समान माना जा रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए की एसआई परीक्षा में पूछे गए सवाल का विवादित विकल्प देने वाले की जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति न हो पाए। ब्राह्मण समाज को लक्षित करके की जाने वाली नफरत को ‘ब्रहमोफोबिया’ कहा जा रहा है, जिसमें उनके धार्मिक प्रतीकों, प्रथाओं और विश्वासों को निशाना बनाया जा रहा है।

फिल्मों, वेब सीरीज और ओटीटी प्लेटफॉर्मों पर ब्राह्मणों को गलत तरीके से प्रस्तुत किए जाने के उदाहरण सामने आए हैं, जिस पर आपत्ति जताई गई है। ऐसे मामलों में प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान न लिए जाने पर चिंता जताई गई है, जिससे ऐसे कृत्य करने वालों का मनोबल बढ़ता है। कुछ व्यक्ति इसे ‘एंटी-भाजपा’ भावना से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि इस समाज को अक्सर भाजपा के समर्थक के रूप में देखा जाता है। इसके इतर सोशल मीडिया पर एनसीईआरटी की इतिहास की किताब का एक पृष्ठ वायरल हो रहा है।

UP Panchayat Chunav 2026: 4 रंगों के बैलेट पेपर से होगा चुनाव, जानें किस पद के लिए कौन सा रंग तय किया प्रशासन ने

किताब में एक चित्र के संदर्भ में लिखा गया है कि ब्राह्मणों ने ब्रिटिश शासक ब्रिटानिया को शास्त्र सौंपे और मानो भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए अंग्रेजों को आमंत्रित किया। इस टिप्पणी को लेकर ब्राह्मण समाज के संगठनों और कई शिक्षाविदों ने कड़ी आपत्ति भी जताई है। इस मसले पर एनसीईआरटी ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की है कि, ये पुरानी किताब है। बेशक ये पुरानी किताब में था, मगर क्या उस समय प्रकाशित करने से पहले इसकी समीक्षा की गई थी?

जब देश का संविधान नागरिकों के बीच समानता का भाव बनाने और एकजुटता पर जोर देने का है तो शिक्षा व्यवस्था में इस प्रकार की चीजें शामिल करना कितना उचित है। कुल मिलाकर ब्राह्मण समाज को एकजुट होकर प्रतिरोध करने की जरूरत है।

Related Articles

Back to top button