सादे कपड़े, छह मीटिंग और…; ISRO की दो नाकामियों की जांच के लिए अजीत डोभाल की ‘सीक्रेट’ एंट्री

Ajit Doval visit VSSC ISRO: भारतीय स्पेस मिशन की रीढ़ और दुनिया का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माने जाने वाले PSLV के निरंतर दो फेल होने से देश की सिक्योरिटी एजेंसियों के सामने एक नया सवाल खड़ा हो गया है। 2025 और 2026 में निरंतर दो फेल होने के बाद, यह जानकारी सामने आई है कि नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल ने खुद ISRO के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर का सीक्रेट दौरा किया था। इस दौरे की काफी चर्चा हो रही है और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
आखिर चिंता क्या है?
ISRO का रॉकेट, जिसका सफल लॉन्च रेट 90 परसेंट से ज़्यादा है, निरंतर दो बार तीसरे स्टेज में फेल क्यों हुआ? क्या यह सिर्फ एक टेक्निकल गड़बड़ी है या भारत की बढ़ती स्पेस पावर को रोकने के लिए बाहर से इसमें छेड़छाड़ की गई है? मीडिया में चर्चा है कि अजीत डोभाल इन्हीं सवालों के जवाब ढूंढने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कहने पर तिरुवनंतपुरम पहुंचे हैं।
सीक्रेट विज़िट और 6 सीक्रेट मीटिंग
मिली जानकारी के मुताबिक, डोभाल का विज़िट इतना सीक्रेट था कि उन्होंने कोई प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया। वे इंडिगो की फ़्लाइट में एक नॉर्मल पैसेंजर के तौर पर आए थे और उनके साथ सिर्फ़ 4 सादे कपड़ों में सिक्योरिटी गार्ड थे। 22-23 जनवरी 2026 के बीच, उन्होंने बंद दरवाज़ों के पीछे VSSC डायरेक्टर और सीनियर साइंटिस्ट के साथ 6 लंबी बातचीत की। उन्होंने डेटा एनालिसिस के ज़रिए रॉकेट सिस्टम को ध्यान से चेक किया कि कहीं किसी बाहरी छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश तो नहीं है।
दो बड़ी नाकामियां; 2500 करोड़ रुपये का नुकसान
1. PSLV-C61 (18 मई 2025): यह रॉकेट EOS-09 सैटेलाइट ले जा रहा था। तीसरे स्टेज के मोटर चैंबर में प्रेशर कम होने की वजह से मिशन फेल हो गया।
2. PSLV-C62 (12 जनवरी 2026): इस मिशन में सर्विलांस सैटेलाइट EOS-N1 समेत 16 सैटेलाइट ले जाए गए थे। एक बार फिर, तीसरे स्टेज में खराबी आ गई और सभी सैटेलाइट नष्ट हो गए। इन दोनों फेलियर से भारत को करीब 2,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
हादसे पर सरकार की सफाई
इस मामले पर, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद में सफाई दी कि दोनों फेलियर के कारण अलग-अलग थे। उन्होंने इसे टेक्निकल फेलियर बताते हुए कहा, “पिछली बार बल्ब फ्यूज हो गया था, इस बार यह बाहर से ट्रिप हो रहा था।” जांच में अभी तक किसी हादसे का कोई सबूत नहीं मिला है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से इंटरनल जांच कमेटियां बनाई गई हैं।
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राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा
EOS N1 जैसे सैटेलाइट देश की सीमाओं की निगरानी के लिए बहुत ज़रूरी हैं। ऐसे ज़रूरी सैटेलाइट का लॉन्च फेल होना न सिर्फ फाइनेंशियल नुकसान है बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी एक बड़ा मुद्दा है। इसीलिए NSA डोभाल ने खुद इस जांच को शुरू किया है। वह जल्द ही प्रधानमंत्री को अपनी डिटेल्ड रिपोर्ट देंगे। दूसरी ओर, ISRO ने जून 2026 तक सभी PSLV लॉन्च रोक दिए हैं। रॉकेट की क्वालिटी जांच अब और कड़ी की जाएगी।



