बिहार विधानसभा चुनाव 2025: राजद प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार करेंगे तेजस्वी

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर चुनाव प्रचार का दौर अब तेजी से शुरू हो चुका है। इस बीच, महागठबंधन में टिकट वितरण को लेकर विवाद और बढ़ता ही जा रहा है। आरजेडी, कांग्रेस और वीआईपी द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद सीटों को लेकर असहमति और रस्साकशी सामने आई है, जो बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है।
आरजेडी का ऐलान, कांग्रेस और वीआईपी की सीटें
राजद (आरजेडी) ने 143 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है। वहीं कांग्रेस ने 60 और वीआईपी ने 14 सीटों पर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया है। हालांकि इस बीच, सबसे बड़ी खबर यह है कि तेजस्वी यादव अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने वाले हैं। यह मामला दरभंगा जिले की गौरा बोराम सीट से जुड़ा है, जहाँ विवाद उठ खड़ा हुआ है।
दरभंगा की गौरा बोराम सीट पर विवाद
आरजेडी ने शुरुआत में अफजल अली खान को गौरा बोराम सीट से उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन महागठबंधन के भीतर सीटों को लेकर समझौता हुआ और वीआईपी को यह सीट दे दी गई। वीआईपी ने संतोष सहनी को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा, और इस पर सभी महागठबंधन दलों ने उनका समर्थन भी किया।
अफजल अली खान की प्रतिक्रिया
सीट के बदलने के बाद आरजेडी ने अफजल अली से अपना चुनावी सिंबल लौटाने और चुनावी दौड़ से पीछे हटने की अपील की। लेकिन अफजल अली ने इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपनी उम्मीदवारी पर कायम रहते हुए पर्चा भी दाखिल कर दिया। अब अफजल अली के नाम के साथ आरजेडी का लालटेन चिन्ह होगा, जबकि तेजस्वी यादव खुद उनके खिलाफ प्रचार करेंगे।
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वीआईपी की स्थिति और सफाई
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच वीआईपी के अध्यक्ष मुकेश साहनी ने इस स्थिति को एक गलतफहमी करार दिया। उन्होंने कहा कि संतोष सहनी अब महागठबंधन के एकमात्र उम्मीदवार हैं और यह विवाद जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। साहनी ने यह भी साफ किया कि वीआईपी और महागठबंधन के बीच कोई मतभेद नहीं हैं और यह झगड़ा सिर्फ कुछ गलतफहमियों का नतीजा है।


