आधार कार्ड बना घोटाले का औजार: उत्तर प्रदेश में राशन घोटाले का बड़ा खुलासा

गाज़ियाबाद। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर राशन घोटाले ने सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों को मिलने वाला अनाज बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े के जरिए बाजार में बेचा गया। इस घोटाले में आधार कार्ड को ही सबसे बड़ा माध्यम बनाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के करीब 50 जिलों में 1.86 लाख से अधिक परिवारों का राशन हड़प लिया गया। घोटालेबाजों ने ‘प्वाइंट ऑफ सेल’ (POS) मशीनों और आधार डेटा में छेड़छाड़ कर असली लाभार्थियों के नाम पर राशन उठाया और बाद में डेटा को फिर से सही कर दिया, जिससे असली कार्डधारकों को भनक तक नहीं लगी।
सबसे ज्यादा मामले इलाहाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा में सामने आए, जहां हजारों परिवार इस घोटाले का शिकार हुए। जांच में सामने आया कि एक ही आधार कार्ड को कई राशन कार्डों से जोड़कर बार-बार राशन उठाया गया।
घोटाले में राशन डीलर, कोटेदार, आपूर्ति विभाग के कर्मचारी और तकनीकी एजेंसियों की मिलीभगत की बात भी सामने आई है। हालांकि कार्रवाई के नाम पर ज्यादातर छोटे स्तर के लोगों पर ही मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि बड़े अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार ने स्वीकार किया है कि इस घोटाले से हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। बावजूद इसके, घोटाले के बाद ही सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही जा रही है, जिससे व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर होती है।
यह मामला यह भी दिखाता है कि तकनीक के सहारे पारदर्शिता लाने की कोशिशें तब विफल हो जाती हैं, जब सिस्टम में शामिल लोग ही उसका दुरुपयोग करने लगें।



